घर पर अपनी मां के साथ आनंद। संवाद
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एटा। यूक्रेन से लौटकर आए शहर के शांति नगर निवासी आनंद प्रियदर्शी शाक्य ने आपबीती बताई। कहा कि डेनिप्रो शहर में भले ही रूस ने उस समय हमले नहीं किए, लेकिन पास के ही शहर खारकीव में लगातार मिसाइलों से धमाके किए जा रहे थे। ऐसे में चिंता घेर लेती थी। जैसे ही कोई तेज धमाका बजता तो यूनिवर्सिटी का सायरन बजा दिया जाता था। यह संकेत होता था कि हमला हो सकता है, सुरक्षा के लिए सभी लोग बेसमेंट में बनाए गए बंकरों में पहुंच जाएं। ऐसे में सायरन बजते ही डर लगने लगता था। चार रातें बंकरों में छिपकर काटीं। इस दौरान खाने-पीने की भी समस्या रही, जो हमारे पास उपलब्ध था, थोड़ा-थोड़ा खाकर उससे ही काम चलाया।
मेडिकल के चौथे वर्ष के छात्र आनंद ने बताया कि 28 फरवरी को बस की बुकिंग मिल गई। रात के समय डेनिप्रो से 50-60 छात्र इस बस में बैठकर रोमानिया बॉर्डर के लिए रवाना हुए। रास्ते में कई जगह बस को रोककर चेक किया गया। करीब 22 घंटे का सफर तय कर रोमानिया पहुंचे। वहां भारतीय दूतावास की ओर से ठहरने और खाने-पीने का अच्छा इंतजाम किया गया था। वापस आने वालों की संख्या बहुत थी, जिसके चलते फ्लाइट मिलने में देरी हुई।
शनिवार को फ्लाइट मिली, जिसने दोपहर 12 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचा दिया। उप्र भवन से एक टैक्सी में बैठाया गया। जिसने रात 11 बजे एटा पहुंचाया। मेरे घर पहुंचने पर मम्मी, पापा और बहन काफी खुश थे। हम लोगों ने देर रात तक बातें कीं। पढ़ाई को लेकर आनंद ने चिंता जताते हुए कहा कि अभी तक यूनिवर्सिटी से कोई संदेश नहीं मिला है। अनिश्चितकाल के लिए पढ़ाई स्थगित कर दी गई है। पता नहीं कब हालात सामान्य होंगे और हमारी पढ़ाई फिर शुरू होगी।