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अजब: लॉकडाउन में नहीं लौटा कोई प्रवासी श्रमिक

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एटा। पिछले साल कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन में बड़ी संख्या में श्रमिक लौटकर आए। जिनका प्रशासनिक स्तर पर ब्योरा भी बनाया गया। निर्देश तो इस बार भी हैं और काफी लोग महानगरों व अन्य प्रदेशों से लौटकर भी आए हैं, लेकिन सरकारी आंकड़े हकीकत से अलग हैं। उसके मुताबिक कोई भी प्रवासी श्रमिक नहीं आया है।
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पिछले साल लॉकडाउन लगने के बाद क्वारंटीन सेंटर बनाए गए थे। प्रवासी श्रमिकों को इनमें रोका जाता था और इनका ब्योरा भी तैयार किया गया। करीब सात हजार श्रमिकों के नाम की सूची बनाई गई थी। जिनके पुनर्वासन के लिए विभिन्न योजनाएं व निर्देश आए, लेकिन इस बार न तो क्वारंटीन सेंटर बने और न ही बाहर से आने वाले श्रमिकों का ब्योरा दर्ज करने के लिए किसी को जिम्मेदारी दी गई।
कुछ दिन राजस्व विभाग के कर्मचारी बस स्टैंड पर बैठाए गए, लेकिन प्रवासी श्रमिक जांच और क्वारंटीन होने के डर से खुद को सामान्य यात्री बताकर निकलते गए। हाल में शासन ने प्रवासी श्रमिकों का ब्योरा मांगा तो प्रशासन में खलबली मच गई। अभी तक जो सूचनाएं हैं, उनमें कोई भी प्रवासी श्रमिक एटा नहीं लौटा है।
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- एक अप्रैल के बाद आए प्रवासी श्रमिकों की सूचना शासन से मांगी गई है, लेकिन अप्रैल में पूरा प्रशासन व सभी विभाग चुनाव में व्यस्त रहे। जिसके चलते सूचनाएं तैयार नहीं हो सकीं। अब प्रशासन स्तर से गांवों में सर्वे कराया जा रहा है। - रामखिलाड़ी, जिला सेवायोजन अधिकारी।
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