गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को पोषण देने के लिए शुरू की गई हौसला पोषण योजना का हौसला टूट रहा है। जिले में तमाम आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं, जहां गर्भवतियों को न तो गर्म खाना मिल रहा और न ही कुपोषित बच्चों को दूध और घी। आलम यह है कि दूध और घी के पैकेट प्रधान और आंगनबाड़ी मिलकर बंदरबांट कर रहे हैं। सिर्फ रजिस्टरों में हौसला पोषण का कोरम हो रहा है। ऐसे पोषण सुधारने की कवायद खुद ही कुपोषण का शिकार हो रही है।
जिले में 25 जुलाई को प्रदेश सरकार ने हौसला पोषण योजना का शुभारंभ किया था। योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवतियों को गर्म खाना और कुपोषित बच्चों को 20 ग्राम घी और दूध का वितरण होना था, लेकिन जिले में योजना की शुरुआत ही खराब रही। पहले दिन सरकारी मशीनरी को आंगनबाड़ियों के विरोध का सामना करना पड़ा। आलम यह है कि गर्भवतियों को दिए जाने वाले गर्मखाने के लिए विभाग की ओर से आंगनबाड़ी और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में धनराशि भेजी जा रही है, लेकिन कई गांवों में प्रधान आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को धनराशि का आहरण ही नहीं करने दे रहे। जबकि तमाम केंद्रों पर खाना बनाने की व्यवस्था नहीं होने से कार्यकत्रियां परेशान हैं। हालांकि विभाग ने अब सरकारी स्कूलों की एमडीएम रसोई में हौसला पोषण का भोजन बनाने के निर्देश दिए हैं। हौसला पोषण योजना के आंकड़ों पर गौर करें तो जुलाई में 23383 गर्भवतियों को भोजन का वितरण हुआ, जबकि 6297 अतिकुपोषित बच्चों को घी, दूध का वितरण कराया गया, लेकिन योजना की हकीकत इससे अलग है। सूत्रों के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी नहीं होने से 40 फीसदी केंद्रों में खाना ही नहीं बंटा। गोद लिए गांवों में अफसरों ने दस्तक नहीं दी। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 120 गांवों के सापेक्ष महज 77 अफसरों ने निरीक्षण में रुचि दिखाई है।
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निधौलीकलां ब्लॉक के गांव अलीपुर खुर्द के आंगनबाड़ी केंद्र में तीन दर्जन बच्चे व डेढ़ दर्जन गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। नियमानुसार बच्चों औ महिलाओं को हर दिन खाना बंटना चाहिए, लेकिन यहां योजना शुरू होने के बाद खाना बना ही नहीं है।
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जलेसर ब्लॉक का गांव सलेमपुर आंगनबाड़ी केंद्र में दो दर्जन गर्भवती महिलाएं व बच्चों का पंजीकरण हैं। इस केंद्र में एक दिन भी गर्म खाना नहीं बना है। खाने की आस में हर दिन बच्चे व महिलाएं पहुंचती हैं। लेकिन उन्हें मायूसी हाथ लगती है।
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जिले के सरकारी अस्पताल में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र में हर दिन औसतन पांच कुपोषित बच्चे पहुंचते हैं। जहां चार-पांच दिन उपचार के बाद उनको वजन कराकर भेज दिया जाता है। अब तक केंद्र पर 300 बच्चे आ चुके हैं।
ब्लॉक आंशिक कुपोषित अतिकुपोषित
मारहरा 2869 664
अवागढ़ 2328 834
जलेसर 2170 764
निधौलीकलां 1638 677
सकीट 3198 932
शीतलपुर 4915 944
जैथरा 3182 493
अलीगंज 2858 799
एटा नगर 972 139
कुल 24062 6297
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हौसला पोषण योजना को दुरुस्त करने के लिए पहल की जा रही है। आंगनबाड़ी संचालिकाओं और सीडीपीओ को निर्देश दे दिए गए हैं। वहीं प्रधानों से भी सहयोग मांगा गया है। हर गर्भवती को गर्मखाना दिया जाएगा। जिन केंद्रों पर खाना नहीं बन रहा है, उनकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- अमर बहादुर सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी