भारत रत्न डा. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर जनपद में विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
शहर कांग्रेस कमेटी ने पार्टी कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धांजलि दी। अध्यक्ष तरुण शर्मा ने कहा कि अंबेडकर आधुनिक युग के मनु थे। उनका संपूर्ण जीवन दलितों के उत्थान तथा उनकी दशा में सुधार लाने के लिए समर्पित था। समाज के प्रति समर्पण के साथ वह राजनैतिक स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक थे। इस अवसर पर सुशील शर्मा, महेंद्रपाल वर्मा, मास्टर अब्दुल समद, शाहिद नूर, बलबीर लोधी, दीप पाण्डेय, जीशान अली, रजनेश उपाध्याय, इरशाद खान आदि लोग मौजूद रहे। अशोक नगर अंबेडकर धर्मशाला में भी एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को बताया। गोष्ठी में बाबूराम बौद्ध, अनार सिंह बौद्ध, सत्यप्रकाश प्रेमी, सत्यदेव कुशवाह, राकेश कुमार, रामनाथ पुष्कर, नवलेश बौद्ध, सीमा माइकल, अतुल बौद्ध, डीसी मौर्य, इतवारी लाल, जगदीश प्रसाद, अयोध्या प्रसाद, राजेन्द्र प्रसाद, मुकेश पाल आदि मौजूद रहे। गंजडुडवारा में नगरपालिका परिसर स्मारक पर परिनिर्वाण दिवस मनाया गया।
अंबेडकर अनुयायियों ने बाबा साहब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। अशोक शाक्य और प्रोफेसर राजकुमार ने कहा कि सामाजिक एवं समाज में नशाबंदी पूर्ण रूप से समाप्त करने, शिक्षित बनने तथा सामाजिक समरसता बनाए रखने की पुरजोर वकालत करने वाले बाबा साहब भारत के प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणास्त्रोत है। संघर्ष के जीवन में भी उन्होंने नई पीढ़ी के लिए कई योगदान दिए। राधेश्याम, पुष्पेन्द्र कुमार, स्मारक समिति के अध्यक्ष सुरेश चन्द्र ने भी विचार रखे। इस दौरान मौहर सिंह गौतम, महामंत्री संजीव महाजन, दलपति सिंह, ओमप्रकाश, मलिखान सिंह, प्यारे लाल, सुमन मोती लाल, सियाराम, अजमेर सिंह, वृजेश कुमार, सुरेश चन्द्र, आमोद बाबू, राकेश कुमार, पन्ना लाल, महेश चंद्र आदि मौजूद रहे।
सहावर में बसपाइयों ने दो मिनट का मौन धारण कर बाबा साहब को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पूर्व उच्चशिक्षा आयोग सदस्य और बसपा नेता प्रोफेसर नीरज किशोर मिश्रा ने ने कहा कि बाबा साहब ने देश व समाज में फैली असमानता को मिटाने का कार्य किया है उनका त्याग और बलिदान भुलाया नहीं जा सकता। आरपी सिंह, डालचंद्र, जाहिद अली निजामी, पुष्पेंद्र कुमार, प्रियंका गौतम, ज्ञान प्रसाद, दिनेश गुप्ता, बाहिद अली, उपेंद्र, रामदीन, गीता देवी, पदम कांत, राजपूत, रामचंद्र आदि मौजूद रहे।