खेतों में गिरीं गेहूं की फसल।
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तेज हवाओं के साथ गुरुवार की रात हुई बारिश, ओलावृष्टि ने एक बार भी अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी। तेज हवाओं से खेत में खड़ी गेंहू, सरसों, जौ आदि फसलें गिरकर बर्बाद हुई हैं। वहीं खेतों में पानी भरने से आलू भीगने से उसके सड़ने की संभावना बढ़ गई है। ओलों की मार से तंबाकू के पत्ते कटने से उसकी भी फसल को नुकसान हुआ है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक तेज हवाओं के साथ हुई बारिश, ओलावृष्टि से करीब 20-25 प्रतिशत फसलों के नुकसान का आंकलन लगा रहे हैं। जबकि किसानों की मानें तो गिरी फसलों को 30-40 प्रतिशत नुकसान हुआ है।
कृषि विज्ञान केंद्र अवागढ़ प्रथारी डॉ असीम निधि ने बताया कि बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि से सभी फसलों को क्षति हुई है। बगैर खुदाई के खेतों में पड़ा आलू जल्द सड़ेगा। वहीं बारिश में भीगा आलू बीज के लायक भी नहीं रहता है। वहीं सरसों की तैयार फसल गिरने से बीज अंकुरण पर फर्क पड़ने के साथ कटी फसल के बीज में नुकसान होगा, लेकिन जो सरसों की फसल अभी तैयार नहीं है। उसे कम नुकसान है। सबसे ज्यादा नुकसान गेंहू की गिरी फसलों को हुआ है। इससे दाने कमजोर होने के साथ उपज भी घटेगी। बागवानी विशेषज्ञ डॉ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि तोरई, लौकी, तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी की बुआई एक-दो दिन में हुई है। उनके जमाव में कमी आने से नुकसान है।
क्या कहते हैं किसान
नगला बख्ती निवासी किसान सुभाष सिंह जादौन ने कहा कि 35 बीघा खेत में गेहूं और सरसों बोई थी। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि ने फसल खेत में बिछ गई हैं। इससे 30-40 प्रतिशत उपज में असर पड़ सकता है। मौसम की इस मार से लागत निकलनी मुश्किल होगी। अवागढ़ निवासी किशन वार्ष्णेय ने कहा दो ट्रक आलू खुले में पड़ा होने के कारण बारिश में खराब हो गया। पहले में मंदी झेल रहे आलू की फसल अब औन-पौने दाम में ही बेचनी होगी। बताया कि गेंहू, सरसों की फसल भी गिरकर बर्बाद हुई है। राजा का रामपुर निवासी किसान अनिल कुमार ने दस बीघा तंबाकू की खेती की है। आधी फसल काट कर खेत में सूखने को डाली थी। बारिश और ओलावृष्टि में भीगने के कारण पत्ते सड़कर खराब हो जाएंगे।