संवाद न्यूज एजेंसी
एटा। हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार नाना-नानी की ममता की जीत हुई। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को निरस्त करते हुए मासूम बच्ची को दोबारा उसके नाना-नानी की देखरेख में सौंपने का आदेश दिया है।
अदालत के आदेश पर 53 दिनों बाद जब मासूम बुधवार रात अपने ननिहाल पहुंची तो आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों के बीच पूरा परिवार रो पड़ा। परिजनों ने नम आंखों से बेटी का स्वागत करते हुए कहा कि उनके संघर्ष को अदालत से सच्चा न्याय मिला है।
शहर के महाराणा प्रताप नगर निवासी अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्रा की पुत्री त्रिशा का विवाह वर्ष 2014 में लखनऊ के सौरभ द्विवेदी के साथ हुआ था। शादी के कुछ समय बाद जन्मे पहले बेटे की असमय मौत हो गई। इसके बाद 12 नवंबर 2018 को त्रिशा ने बेटी को जन्म दिया।
खुशियां अभी संभल भी नहीं पाई थीं कि महज आठ दिन बाद 20 नवंबर को दिल का दौरा पड़ने से त्रिशा का निधन हो गया। मां के आंचल से हमेशा के लिए महरूम हुई नौ दिन की नवजात को उसके नाना अशोक कुमार, नानी ज्योतिर्मयी, मामा आयुष और मामी स्वाति ने कलेजे से लगा लिया। ननिहाल में लाड-प्यार के बीच पली-बढ़ी बच्ची अब आठ वर्ष की होकर तीसरी कक्षा में पढ़ रही है।