एटा। सर्दियों में गोवंश को अब पुआल का सहारा दिया जाएगा। जिलाधिकारी सुखलाल भारती ने बृहस्पतिवार को पत्र जारी कर इसके निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने पशुओं को जूट के बोरे पहनाए जाने, जब तक सर्दी पड़े तक तक पशुओं को ज्वार व बाजरा का चारा देने और मादा पशुओं को प्रसव के बाद गुनगुना पानी पिलाए जाने के निर्देश दिए हैं।
जिले में स्थाई व अस्थाई 22 गोशालाएं संचालित हैं। इनमें करीब 2200 निराश्रित पशु रह रहे हैं। इनको सर्दी से बचाने के लिए डीएम सुखलाल भारती ने निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है जब तक सर्दी पड़े तब तक पशुओं को भूसे के साथ ज्वार व बाजरा की कुट्टी खिलाई जाए। रोशन दान आदि को टाट के बोरों से ढक दें।
वहीं पशुओं के बैठने के स्थान पर पुआल बिछाएं। अधिक सर्दी पड़े तो पशुओं को अलाव जलाकर राहत दी जाए। गर्भित गोवंश का सर्दी में विशेष ध्यान रखा जाए। अगर किसी गोवंश को कंपकपी, बुखार के लक्षण हों तो उसे तत्काल चिकित्सक को दिखाएं। जिससे पशु को समय से उपचार मिल सके।
सर्दी से पशु मरा तो अधिकारी जिम्मेदार
डीएम ने सख्त निर्देश दिए है कि अगर सर्दी लगने से किसी भी गोवंश की मृत्यु होती है तो उसके लिए संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे। उन्होंने कहा कि गोशालाओं में रहने वाले पशुओं को विशेष ध्यान दिया जाए।
जिले में स्थाई गोशालाएं- 6
अस्थाई गोशालाएं- 16
गोशालाओं में रह रहे निराश्रित पशु- 2250
समय- समय पर चिकित्सक करते निरीक्षण
गोशालाओं में चिकित्सक समय- समय पर निरीक्षण करते हैं। इस दौरान वह पशुओं को देख उनका उपचार करते है। पशुओं को बीमारी से बचाने के लिए टीकाकरण भी किया जाता है।
केपी सिंह, सीवीओ