एटा। निराश्रित पशुओं को आसरा मिले। इसके लिए शासन ने प्रत्येक नगर निकाय में कान्हा उपवन खोलने के निर्देश दिए हैं। अवागढ़ में निर्माणाधीन उपवन स्टे के फेर में उलझ गया है। यहां एक पक्ष खुद की जमीन बताकर कोर्ट से स्टे ले आया है। इस पर आयुक्त ने ग्राम समाज के नाम दाखिल खारिज न करने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन एक सप्ताह बाद भी राजस्वकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
तहसील प्रशासन ने वर्ष 2018 में नगला नया में एक हेक्टेयर भूमि को ग्राम सभा की बताकर नगर पंचायत को कब्जा करा दिया गया। वर्ष 2019 में जनवरी माह में तत्कालीन मंडलायुक्त अजयदीप सिंह ने इसका शिलान्यास कर दिया। जहां यह उपवन एक करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से बनना है। निर्माण शुरू होते ही गांव के एक पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की जहां उसे जमीन का स्टे मिल गया।
बीते दिनों अपर आयुक्त प्रशासन शमीम अहमद ने एसडीएम जलेसर को पत्र भेज दोषी राजस्व कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसमें उन्होंने कहा 1998 में भूमि ग्राम समाज को दी गई, लेकिन खतौनी में यह भूमि कुंवरपाल के ही नाम चलती रही। वहीं 2008 में कुंवरपाल की मौत के बाद राजस्व निरीक्षक के आदेश पर यह भूमि कुंवरपाल के भतीजे विनोद के नाम कर दी गई। जहां तहसील प्रशासन ने भूमि को अवागढ़ नगर पंचायत को कान्हा गोशाला के लिए दिया गया। जहां दूसरा पक्ष भूमि पर स्टे ले आया, लेकिन एक सप्ताह बाद अभी तक दोषी राजस्वकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जलेसर एसडीएम अरुण कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। वर्ष 1995 में जो राजस्वकर्मी थे। उनके अभिलेखों की पड़ताल की जा रही है। जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।