एटा। जैथरा थाना क्षेत्र के गांव कूकपुरा में बृहस्पतिवार को हुए हादसे में दादी और उसकी तीन नातिन को जान गंवानी पड़ी, लेकिन यह भी इत्तेफाक था कि उसी समय बेटियों का पिता डेयरी पर गया हुआ था और बकरी के मिमियाने पर मां बाहर निकल गई थी। नहीं तो ये दोनों भी हादसे का शिकार हो सकते थे।
हादसे के बाद से रामगोपाल और उनकी पत्नी शीला देवी बदहवास हैं। रामगोपाल ने बताया कि रोज की तरह शाम के समय वह दूध देने के लिए डेयरी पर गया हुआ था। उसको नहीं पता था कि जब तक लौटेगा तब तक मां और बेटियों को खो देगा। वहीं शीला देवी ने रोते हुए बताया कि खाना खाने के बाद सभी लोग सोने जा रहे थे। मैं भी लेटने की तैयारी कर रही थी। तभी घर के बाहर बंधी हुई बकरी बुरी तरह से मिमियाने लगी। उसकी आवाज से लग रहा था कि शायद गले में रस्सी का फंदा कस रहा है।
इस पर बकरी को देखने चली गई। रस्सी सही कर रही थी, तब तक बरामदे की छत भरभराकर गिर चुकी थी। यह देखकर मुंह से चीख निकली तो आसपास के लोग भागकर आए और मलबा हटाना शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद मलबे में दबे हुए 6 लोगों को निकाला गया। हादसे के बाद से शुक्रवार की शाम तक परिवार के अन्य लोगों ने कुछ खाया तक नहीं है।