एटा। ताज ट्रिपेजियम जोन में आने के कारण जलेसर के घुंघरू-घंटा उद्योग पर ग्रहण लगा हुआ है। यहां अधिकांश कारीगर कोयले की भट्ठियों पर ही पीतल को गलाने-ढालने का काम कराते हैं। प्रदूषण को लेकर प्रतिबंध के कारण कई इकाइयां बंद हैं तो नई इकाइयां स्थापित नहीं हो पा रहीं। ऐसे में इस उद्योग की सूरत गैस पाइपलाइन संवार सकती है। उद्यमियों से बात की जा रही है, लेकिन समस्या यह बनी हुई है कि फिरोजाबाद से लाइन बढ़ाकर लाने के लिए कम से कम 40 इकाइयों के कनेक्शन होने चाहिए।
घुंघरू-घंटा व अन्य पीतल उत्पादों की जलेसर में 160 इकाइयां पंजीकृत हैं। जबकि बिना पंजीकरण के भी कई छोटी इकाइयां संचालित हैं। दशकों से यहां कोयले की भट्ठियों पर ही काम होता रहा है, लेकिन टीटीजेड के कारण इन पर रोक लगाई गई है। काम के लिए कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है। ऐसे में 40 बड़ी इकाइयां तो पूर्व में बंद हो चुकी हैं। जबकि संचालित इकाइयों को भी दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। विभाग और व्यापारी सुधार के लिए गैस पाइपलाइन को जरूरी मान रहे हैं।
बीमारियाें पर भी लगेगा अंकुश
कोयले की भट्ठियों से निकलने वाला धुआं कारीगरों के लिए आफत बनता है। यहां काफी संख्या में लोग टीबी सहित फेफड़े संबंधी बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। गैस भट्ठियों से प्रदूषण थमेगा तो बीमारियों पर भी अंकुश लगेगा।