ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में लगभग 200 तालाब हैं। पर, इस भीषण गर्मी के मौसम में ज्यादातर सूखे पड़े हैं। इससे गर्मी में पशु-पक्षी, मवेशी प्यास से बेहाल हैं। वहीं पशुपालकों को भी दिक्कतें हो रही हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से तालाबों के भराने की मांग की है।
बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब खुदवाने के पीछे मंशा जलस्तर दुरुस्त रखने के अलावा गर्मी में पशु-पक्षी एवं मवेशियों को पीने का पानी मिल सके। करोड़ों रुपये खर्च करके खोदे गए ज्यादातर तालाब इन दिनों सूखे पड़े हैं। इनमें पानी भराने के लिए ग्राम प्रधान रुचि नहीं दिखा रहे हें। पशु, पक्षी गर्मी में प्यास से इधर उधर भटक रहे हैं। नदियों व नहरों के किनारे के ग्रामीण को अपने पशुओं को पानी के लिए नहरों तक ले जाते हैं। लेकिन जहां पानी की व्यवस्था नहीं हैं वहां पशुपालकों को खासी दिक्कत होती है। क्षेत्र के गांव खेरिया, नादरमई, शेरपुर, नगला गढी, नगला मोती, फकौता, अभयपुरा, अल्लीपुर, जारई आदि दर्जनों गांवों के तालाब सूखे हैं। नगला गढ़ी निवासी उमेश कुमार ने बताया कि तालाबों में पानी भरवाने को ग्राम प्रधान ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। पशुपालक रामौतार का कहना है कि इन दिनों काली नदी का पानी भी गंदा हो चुका है। तालाब सूखे पड़े हैं। इससे दिक्कत है। गांव के रमेश, सुनील, अजयपाल, शैलेंद्र, देवेंद्र, राजाराम, जजवीर, नीटू, शेखर, रामपाल सिंह, हरेंद्र, रनवीर सिंह, ओमवीर सिंह, यशपाल सिंह आदि ने तालाब एवं पोखरों को भरवाने की मांग की है।
बीडीओ गोविंद प्रसाद शुक्ला का कहना है कि तालाबों में पानी भरावाना ग्राम प्रधानों की जिम्मेदारी हैं। ग्राम प्रधान अपने अपने ग्रामों के तालाबों में पानी भरावएं।