एटा। जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबूराम वर्मा के बुलावे पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी असहयोग आंदोलन के बाद एटा आए थे। शहर में घंटाघर पर विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी। बाबूराम वर्मा की पौत्रवधू डॉ. निरुपमा वर्मा बताती हैं कि बाबा काफी कम उम्र से ही स्वतंत्रता आंदोलनों में सहभागिता करने लगे थे। एटा में कई आंदोलनों का नेतृत्व किया।
कई बार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सीधे संपर्क में आए। 1922 में असहयोग आंदोलन के बाद उनके बुलावे पर गांधीजी एटा आए थे। वर्तमान में जिस जगह सब्जी मंडी है, वहां उनकी सभा हुई थी। जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। इस दौरान कई लोगों ने जंग ए आजादी के लिए अपने-अपने स्तर से आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया। घंटाघर वाली जगह पर विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई थी।
गांधी जी के भाषण सुन हो गए आजादी के दीवाने
जलेसर/राजा का रामपुर। तहसील क्षेत्र के गांव नोहखास निवासी पं. कालीचरन शर्मा ने आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी पुत्रवधू शकुंतला शर्मा ने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गाधी के आह्वान पर उत्साह के साथ भाग लिया था। कई बार जेल गए, ब्रिटिश हुकूमत से बेतों की सजा पाई थी। वह कहती हैं कि गांधी जी के आदर्श और शिक्षा आज के दौर में भी प्रासंगिक हैं। अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलकर बड़ी से बड़ी समस्या से मुकाबला किया जा सकता है।
वहीं अलीगंज निवासी प्रमोद कुमार वर्मा बताते हैं कि पिता रघुवीर सिंह किशोरावस्था से ही गांधी जी के प्रभाव में आजादी की जंग में शामिल हो गए। 26 जनवरी 1931 को उन्होंने मेहता लाइब्रेरी पर तिरंगा फहरा दिया। कई अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी किए। जिसके चलते अंग्रेज हुकूमत ने दमनात्मक नीति अपनाते हुए गांव पट्टी स्थित हमारे पैतृक घर को तहस-नहस कर दिया था। इसके बावजूद भी अहिंसा के रास्ते पिताजी आजादी की जंग में आगे बढ़ते गए। वह बताते हैं कि पिताजी ने हमेशा हम लोगों को भी सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया।