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गांधीजी के बलिदान दिवस को बिसरा रहे लोग

Fri, 30 Jan 2015 11:30 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला एटा
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बलिदान को लोग बिसरा रहे हैं। युवा पीढ़ी को तो इस दिन के बारे में जानकारी तक नहीं। शैक्षिक संस्थाओं और एक-दो विभागों को छोड़कर अन्य सरकारी-गैर सरकारी कार्यालयों में लोगों को यह याद ही नहीं रहा कि 30 जनवरी को बापू की पुण्यतिथि है। पूर्व में इस दिन पूर्वाह्न 11 बजे गांधीजी को श्रद्धांजलि देने के लिए सरकारी विभागों में बजने वाला सायरन भी इस बार सुनाई नहीं दिया। घंटाघर चौराहे पर लगी बापू की प्रतिमा की सफाई भी गणतंत्र दिवस पर ही की गई थी। पुण्यतिथि पर उस प्रतिमा की भी किसी ने सुध नहीं ली।
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बापू की पुण्यतिथि सिर्फ सरकारी कार्यालयों में ही दो मिनट के मौन तक सिमटकर रह गई। शिक्षण संस्थाओं और अन्य सामाजिक संगठनों ने तो यह भी नहीं किया। कुछ कालेजों में छात्र-छात्राओं और बाजारों में युवाओं से बात करने पर पता चला कि उन्हें गांधीजी के बलिदान दिवस के बारे में जानकारी तक नहीं है। वह सिर्फ यही जानते हैं कि दो अक्तूबर को गांधी जयंती होती है।


नहीं दिखाई देता चरखा और सूत
एटा। स्वदेशी के वाहक रहे बापू को भूल रहे लोग उनके नाम पर सियासत और कारोबार ही कर रहे हैं। जिले में खादी की दर्जनों संस्थाएं संचालित हैं। इसके बावजूद चरखा, सूत नहीं दिखता। जानकारों के अनुसार कई वर्षों से यह काम लगभग बंद हो चुका है।  
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राष्ट्रीय पर्व पर आती है प्रतिमा की याद
एटा। शहर में घंटाघर पर गांधीजी की प्रतिमा लगी हुई है। यदि राष्ट्रीय पर्व को छोड़ दिया जाए तो अन्य दिनों में उसकी सफाई की सुध किसी को नहीं आती। सबसे दुखद तो यह है कि उनकी पुण्यतिथि पर भी लोगों को प्रतिमा की सफाई की जरूरत नहीं समझी। गणतंत्र दिवस पर ही सफाई करके इसकी इतिश्री कर दी गई।


स्कूल-कॉलेजों में नहीं दी श्रद्धांजलि
एटा। कलक्ट्रेट और विकास भवन पर अधिकारियों व कर्मचारियों ने पूर्वाह्न 11 बजे दो मिनट का मौन धारण कर गांधीजी को श्रद्धांजलि दी। मगर इसके लिए पूर्व में बजने वाला सायरन इस बार नहीं बजा। स्कूल-कॉलेजों में तो दो मिनट का मौन भी नहीं रखा गया। 


कांग्रेस ने ही याद किए बापू
एटा। गांधीजी के नाम पर राजनीति करने वाले अधिकांश दलों ने शहीद दिवस पर कोई आयोजन नहीं किया। कांग्रेस कार्यालय पर ही गुरुवार को राष्ट्रपिता की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।



गांधीजी कर्मयोगी संत थे। संपूर्ण देश को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने का श्रेय उन्हीं को जाता है। बापू के व्यक्तित्व से अनभिज्ञता नई पीढ़ी का दुर्भाग्य है। इसके लिए शिक्षा पद्धति भी दोषी है। इसमें देश के महापुरुषों के बारे में अधिक नहीं पढ़ाया जा रहा।
- हरनाथ सिंह यादव, पूर्व एमएलसी


बापू शांति के दूत थे। उनका व्यक्तित्व देश में ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय जगत में भी स्वीकार्य है। अधिकांश लोकतंत्र गांधी के पुजारी हैं। उनके आदर्शों के अनुयायी हैं। उनके देश में ही उनकी उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण है।
- सत्यप्रवीन गुप्ता, बैंक अधिकारी




छोटे बच्चे सबसे पहले गांधी-नेहरू को ही पढ़ते हैं। बापू फोटो से लेकर कहानियों में भी अच्छे लगे। उनके बताए मार्ग पर चलना हर भारतवासी का संकल्प होना चाहिए।
- आशीष मिश्रा, छात्र



देश को गांधीजी का बलिदान हमेशा याद रहेगा। वे युवाओं के प्रेरणास्त्रोत हैं। देश की स्वतंत्रता के लिए उनके द्वारा किए गए आंदोलनों को कभी भूला नहीं जा सकता।
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- विनोद सिंह, छात्र
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