सड़कें ही विकास का आइना होती हैं। पर, जिले की ज्यादातर सड़कों ही हालत जर्जर है। गड्ढों में तब्दील इन रास्तों पर हिचकोले खाते वाहनों से सफर मुश्किल हुआ है। ऐसे में 15 जून तक सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का निर्देश से भले ही राहत की उम्मीद बंधी है, लेकिन जिले की सड़कों के हाल को देखते हुए यह राह आसान नजर नहीं आती। पीडब्ल्यूडी भी सड़कों के निर्माण के कई प्रस्ताव शासन को भेज चुका है, लेकिन वे भी अब तक लंबित हैं।
एटा-गंजडुंडवारा मार्ग
जिले के एटा-गंजडुंडवारा जाने वाले 35 किमी लंबे मार्ग क्षतिग्रस्त पड़ा है। वर्ष 2013 में मार्ग को टू लेन कराने के लिए पीडब्ल्यूडी ने पहल की। पर, सड़क दो साल भी पूरे नहीं कर सकी। सड़क आज गड्ढे में तब्दील है। जहां आए दिन हादसे के शिकार होते रहते हैं।
एटा-शिकोहाबाद मार्ग
जिले में 50 किमी लंबे एटा-शिकोहाबाद मार्ग को भी गड्ढों से निजात चाहिए। यूं तो राज्य योजना के तहत वर्ष 2015-16 में मार्ग को थ्री लेन करने का काम शुरू हो चुका है। पर, काम की धीमी रफ्तार को देखते हुए 15 जून तक काम पूरा होना संभव नजर नहीं दिख रहा है। फिलहाल यह सड़क निर्माण के नाम पर खोद दी गई है।
एटा-टूंडला मार्ग
जिले को आगरा से जोड़ने वाले एकमात्र एटा-टूंडला मार्ग भी बदहाल है। वर्ष 2016-17 में पीडब्ल्यूडी ने शासन को मार्ग के चौड़ीकरण और निर्माण के लिए 60 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन शासन से मुहर नहीं लग सकी। आलम यह है कि पूरा मार्ग जर्जर हो चुका है।
इन मार्गों में भी है गड्ढे ही गड्ढे
जिले के एटा-कासगंज, अलीगंज-कायमगंज, निधौलीकलां-नगरिया, मारहरा-कासगंज, जलेसर-आगरा, अवागढ़-जलेसर आदि मार्गों पर भी गड्ढ़े ही गड्ढे हैं। इसके अलावा शहर में रेलवे रोड, ठंडी सड़क, मेहता पार्क, कटरा मोहल्ले की सड़क भी क्षतिग्रस्त है।
शासन में लंबित पड़े प्रस्ताव
पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों की मानें तो जिले में सड़क निर्माण और नवीनीकरण के तमाम प्रस्ताव शासन में लंबित पड़े हैं। प्रस्तावों पर मुहर लगे और बजट मिले तो काम शुरू कराया जाए। एक्सईएन वहीद बख्श ने बताया कि अभी हाल ही में 10 मार्गों के निर्माण के लिए 33 करोड़ रुपये मिले हैं। काम शुरू कराया जा रहा है। अन्य प्रस्तावों पर मुहर लगने और बजट मिलने का इंतजार है।