एटा। जिले में 14 राजस्व लिपिक फर्जी तरीके से नौकरी कर रहे हैं। कई बार इनकी जांच कराई गई, पर हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सभी 14 राजस्व लिपिकों की पत्रावलियों में से शासन का नियुक्ति आदेश गायब हो गया है। वहीं संबंधित अन्य पत्रावलियों सहित जांच रिपोर्ट भी गायब कर दी गई है। मामला शासन स्तर पर पहुंचने के बाद जिलाधिकारी ने मामले में गृह विभाग से जांच की सिफारिश की है।
मामला वर्ष 1995 का है। तत्कालीन जिलाधिकारी आरके दुबे ने राजस्व परिषद के एक आदेश के आधार पर 14 लिपिकों को कलक्ट्रेट और तहसील में नियुक्ति प्रदान की थी। नियुक्तियां फर्जी होने की शिकायत मनोज कुमार के द्वारा की गई तो तत्कालीन जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराई। जांच में पता चला कि सभी लिपिकों की पत्रावलियों में से नियुक्ति आदेश गायब है। कार्रवाई न होने पर मामला उछला तो जिलाधिकारी सुखलाल भारती ने मामले की जांच तत्कालीन अपर जिलाधिकारी केपी सिंह से कराई, पर उनका इस बीच स्थानांतरण हो जाने से मामला फिर से दबा दिया गया।
प्रशासन स्वीकार रहा, पत्रावलियां गायब
बनगांव रोड निवासी रवीश कुमार गोला ने इस संबंध में सूचना का अधिकार के तहत जब जानकारी मांगी तो कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। अपर जिलाधिकारी द्वारा दी गई सूचना में उल्लेखित किया गया है कि 14 राजस्व लिपिकों की पत्रावलियों में राजस्व परिषद की नियुक्ति संबंधी आदेश की प्रति और सूची उपलब्ध नहीं है। प्रशासन ने स्वीकारा कि व्यक्तिगत पत्रावलियों में परिषद का आदेश उपलब्ध न होने के कारण यह भी पता नहीं चल पाया कि इन नियुक्तियों का आदेश किस अधिकारी ने कब दिया। यहां तक की मामले की जांच कराने और जांच आख्या सहित राजस्व परिषद द्वारा कराई जाने वाली जांच की पत्रावलियां तक गायब हैं।
शासन से की जांच की सिफारिश
प्रशासन ने आरटीआई में स्वीकारा कि 14 लिपिकों की नियुक्ति संबंधी शिकायती पर की जांच के लिए जिलाधिकारी सुखलाल भारती द्वारा प्रकरण में समिति गठित की गई थी, लेकिन जांच के दौरान पत्रावलियां न मिलने से स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। इसके बाद जिलाधिकारी सुखलाल भारती ने मामले की जांच प्रमुख सचिव गृह (पुलिस) अनुभाग से कराए जाने के लिए लखनऊ पत्र प्रेषित किया है।
यह लिपिक हैं शामिल
होती लाल, वासुदेव, मोहन लाल, मोहन कुमार यादव, रूप किशोर, भैरों प्रसाद, मोहम्मद इंतजार हुसैन, नरेंद्र सिंह यादव, कैलाश नारायण, संजीव कुमार, दीपक, विनीत, परशुराम और महेंद्र पाल सिंह शामिल हैं।