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बाघ: पंजों की छाप पर वन विभाग की जांच शुरू

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एटा। शीतलपुर ब्लॉक क्षेत्र के गांव नगला समल में पहुंचे बाघ के पंजों की छाप पर वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है। इनके फोटो लेकर नेशनल डाटा सेंटर भेजे जाएंगे। साथ ही पता किया जा रहा है कि उसके आने का रास्ता क्या रहा है। गांव में रविवार सुबह करीब 5.30 बजे बाघ देखा गया था। इसके हमले में अवनीश और लोचन घायल भी हो गए। बाद में अलीगढ़ मंडल के सभी जिलों सहित आगरा, मेरठ, इटावा, दिल्ली की वन विभाग की टीमों ने यहां आकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था। करीब आठ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे काबू कर लिया गया। रात 2.30 बजे उसे इटावा लाइन सफारी सुरक्षित पहुंचा दिया गया।
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उधर, सोमवार को स्थानीय वन विभाग की टीम ने नगला समन और आसपास के गांवों में बाघ के पंजों के निशानों की पडताल की। डीएफओ दिवाकर वशिष्ठ ने बताया कि तीन टीमें लगाई गई हैं। पंजों के निशानों से देखा जा रहा है कि बाघ के आने का रास्ता क्या रहा है। साथ ही निशान के फोटो लेकर नेशनल डाटा सेंटर को भेजे जाएंगे। इससे पता लगाया जाएगा कि वह कहां से आ सकता है। उन्होंने बताया कि लाइन सफारी में इस बाघ ने भोजन खाना शुरू कर दिया है। इसका मतलब होता है कि जानवर पूरी तरह स्वस्थ है। अभी कुछ दिन उसे विशेषज्ञों के पर्यवेक्षण में रखा जाएगा। डीएफओ ने यह भी बताया कि इस प्रजाति के पूरे भारत में करीब 1700 और उत्तर प्रदेश में केवल 200 बाघ हैं।
ग्रामीण भी जानने को उत्सुक, कहां से आया बाघ
यह जानने के लिए नगला समल के ग्रामीण भी उत्सुक हैं कि आखिर बाघ यहां आया कहां से? गांव के श्यौराज सिंह, विक्रम राजपूत, सुखवीर आदि ने कहा कि यह पता लगना जरूरी है कि बाघ कैसे और कहां से आया। चिंता भी है कि फिर कोई और बाघ इधर न आ जाए, जिससे खतरे के हालात बनें।
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