एटा। पांच सौ साल में पहली बार होगा, जब पांच दिवसीय दीपोत्सव इस बार चार दिन ही मनाया जाएगा। त्रयोदशी और चतुर्दशी एक ही दिन पड़ने के कारण धनतेरस और छोटी दीपावली का त्योहार जहां 13 नवंबर को मनाया जाएगा, वहीं दीपावली का पूजन 14 नवंबर को होगा। पंद्रह को गोवर्धन पूजा और 16 को भैयादूज का पर्व मनाया जाएगा। हालांकि कुछ लोग 13 को धनतेरस मनाएंगे जबकि 14 को छोटी और बड़ी दीपावली एक साथ मनाएंगे।
काली मंदिर के पुजारी संजीव दीक्षित ने बताया कि पांच सौ साल में पहली बार ऐसा देखने को मिलेगा, जब नरक चतुर्दशी और धनतेरस का त्योहार एक ही दिन पड़ रहा है। यह सब तिथियों के हिसाब से हो रहा है। दो त्योहार एक ही दिन पड़ने के कारण लोग अलग-अलग समय पर दोनों त्योहारों का पूजन कर सकेंगे।
ज्योतिषाचार्य गोविंद देव ने बताया कि 12 नवंबर को रात 9:30 बजे से त्रयोदशी लग जाएगी, जो 13 नवंबर को सायंकाल 5:59 मिनट तक रहेगी। वहीं 5:20 बजे सूर्यास्त हो जाएगा। इसके बाद चतुर्दशी लगेगी। इसी दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धनवंतरी की जयंती है। ऐसे में धनतेरस का त्योहार और नरक चतुर्दशी एक ही दिन मनाई जाएगी। इस दिन प्रदोष वेला सायं 5:45 बजे से आरंभ होकर 8:25 बजे तक रहेगी।
प्रदोष काल में व्यापारी प्रतिष्ठान और दुकानों पर कुबेर पूजा और श्रीयंत्र पूजन कर सकेंगे। गोविंददेव ने बताया कि शनिवार 14 नवंबर दोपहर दो बजे से अमावस्या लगेगी। उदयातिथि के हिसाब से इस दिन लक्ष्मी पूजन श्रेष्ठ माना गया है। दीपावली का पूजन अमावस्या में ही किया जाता है। वहीं 15 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 16 नवंबर को भैयादूज का त्योहार मनाया जाएगा।
पूजन का समय
13 नवंबर
धनतेरस-धनवंतरी पूजन सुबह 9:30 बजे से
नरक चतुर्दशी-प्रदोष वेला सायं 5:45 से 8:25 तक
14 नवंबर-दीपावली पूजन
अमृत वेला-दोपहर 1:43 बजे से 4.24 बजे तक (व्यापारिक पूजन)
गोधूली वेला-शाम 5:45 से रात 8.24 बजे तक(सामान्य पूजन)
वृख लग्न-शाम 5:49 से 7:46 बजे तक (घरों मे पूजन)
सिंह लग्न- रात 12:17 बजे से रात 2.33 तक (सिद्घी और तंत्र साधक)
15 नवंबर-गोवर्धन पूजा
इस दिन सुबह 10.36 बजे तक अमावस्या रहेगी। इसके बाद दोपहर 12:30 बजे तक गोवर्धन पूजन किया जा सकेगा।
16 नवंबर-भैयादूज
सुबह सात बजे तक प्रतिपदा रहेगी। वहीं सुबह 8 बजे से 9:20 बजे तक काल बेला रहेेगी। इन समय को छोड़कर किसी भी समय बहनें भाइयों को तिलक कर सकेंगी।