जमीन के विवाद के चलते अपने ही बच्चों की अपहरण का पिता ने पूरा खाका तैयार किया था। गुरुवार को पुलिस ने थाना खंदोली क्षेत्र के मुड़ी चौराहा पर खड़े मिले दोनों अपहृत बालकों तन्नु और हिमांशु को बरामद कर लिया। पूछताछ के दौरान बच्चों द्वारा बताई गई अपहरण की वारदात से पुलिस भी अचंभे में पड़ गई।
सीओ महेशचंद्र ने बताया कि दोनों अपहृत बच्चों को मुड़ी चौराहा से बरामद कर कोतवाली लाया गया था। तन्न, हिमांशु ने बताया कि तन्नू कक्षा 10वीं का छात्र है। गत 17 जुलाई को मंदिर बेरनी पर प्रसाद वितरण के दौरान पिता विनीत पचौरी ने कहा था कि तुम्हारे चाचा की बाइक तुम्हारे मौसा के यहां आगरा खड़ी है। तुम व हिमांशु दोनों आगरा जाकर ले आओ। हम दोनों को पापा ने एक स्विफ्ट कार में बैठाकर आगरा मौसा के यहां भेज दिया था। तीन दिन मौसी के घर रुके थे। फिर महावन में छोड़ आए। 22 जुलाई को पिता विनीत पचौरी उर्फ लल्ला ने खंदोली चौराहा पर कुछ देर खड़े होने की बात कही और कहा कि मैं अभी आ रहा हूं। उनके आने से पहले पुलिस पहुंच गई और बच्चों को बरामद कर थाने ले आई है। 17 जुलाई को ग्राम बेरनी मेें भागवत कथा में भंडारे के दौरान तन्नू, हिमान्शु का अपहरण हो गया था। केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया एवं बसपा सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे रामवीर उपाध्याय गांव बेरनी पहुंचे थे।
विनीत हत्या के आरोप में जा चुका है जेल
अपहरण की योजना तैयार करने वाला विनीत उर्फ लल्ला वर्ष 2000 मेें शाहगढ़ी के विजय सिंह जाटव की हत्या में जेल जा चुका है। वहीं पर अपहरण की घटना में शामिल दो अन्य आरोपियों से मुलाकात हुई। मौजूदा वर्ष में टेंट व्यवसायी राकेश ने इन्हीं दोनों आरोपियों से पकड़ कराने की बात की थी। लेकिन आरोपियों द्वारा विनीत उर्फ लल्ला को उक्त मामले की जानकारी दे दी थी।
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7 दिनों में तन्नु की मां के चेहरे पर शिकन नहीं थी
सीओ ेने बताया कि बेरनी में बच्चों के अपहरण की घटना के दूसरे दिन तन्नु की मां के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। वहीं हिमांशु की मां परेशान थी, उसी से अपहरण की कहानी झूठी प्रतीत हो रही थी। पुलिस संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
इससे पहले भी झूठी है अपहरण की घटनाएं
इससे पहले गोलनगर निवासी देवेंद्र ने खुद की अपहरण की साजिश रची थी, मगर पुलिस ने जांच की तो मामला झूठा निकला। देवेंद्र ने खुद ही अपहरण की साजिश रची थी। प्रिटिंग प्रेस व्यवसाई का पुत्र सोैरभ भी पढ़ाई के डर से लापता हुआ था। वहीं उपजिलाधिकारी का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मनोज के परिजनों ने भी झूठी अपहरण की कहानी तैयार की थी। वह भी एक सप्ताह के बाद वापस अपने घर लौट आया।