एटा। धान, गेहूं और सब्जियों की पारंपरिक खेती से हटकर मसालों की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा हो सकती है। इसके लिए किसानों को प्रेरित किया जाएगा। ताकि परंपरागत खेती छोड़कर मसालों की ओर किसानों को मोड़ा जा सके।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसान परंपरागत खेती करते आ रहे हैं। धान गेहूं उगाते-उगाते भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम हो रही है। क्योंकि इन फसलों को उगाने के लिए अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है। मसाला वर्गीय फसलों के लिए अच्छी जीवाश्म वाली दोमट मिट्टी एवं बलुई दोमट मिट्टी जिसका पीएच मान 6.5 से 7.5 तक होता है, उपयुक्त रहती है।
प्रमुख रूप से मसालों की खेती की जिले में अच्छी संभावनाएं हैं। इनमें धनिया, मेथी, मिर्च, हल्दी, कलौंजी, सौंफ की खेती करके किसान अधिक लाभ कमा सकते हैं। इनकी बुवाई नवंबर माह में शुरू हो जाती है। जिला उद्यान अधिकारी डाॅ. सुनील कुमार ने बताया कि किसानों को मसालाें की खेती की ओर प्रेरित करने के लिए शिविर लगाकर जागरूक किया जाएगा, ताकि इस खेती की ओर उन्हें मोड़ा जा सके। इस खेती से किसानों का काफी लाभ है और कम लागत में मुनाफा कमाया जा सकता है। कई तरह के बीज विभाग से निशुल्क भी दिए जाएंगे।