एटा। जिला में बड़ी संख्या में किसान फसल की सिंचाई के लिए सरकारी नलकूपों पर निर्भर हैं। जहां नहर, रजबहा आदि साधन नहीं हैं, वहां पर नलकूप ही सहारा होते हैं। लेकिन कुछ नलकूपों में तकनीकी खराबी होने के चलते किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभाग की ओर से बंद पड़े नलकूपों का चिह्नीकरण कर लिया है। किसानों को इनके सही होने का इंतजार है। नलकूप विभाग के जिला में 38 नलकूप ऐसे हैं जो बंद हो चुके हैं। इनको चिह्नित किया गया है और रीबोर कराकर किसानों को सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराए जाने पर जोर दिया जा रहा है। ताकि किसानों की फसलों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़े। यह ऐसे नलकूप हैं जो तकनीकी खराबी अथवा बोरिंग फेल के हैं। इसके लिए विभाग की ओर से पूरी कार्य योजना तैयार की गई है। ताकि खरीफ की फसल आते-आते नलकूपों को संचालित किया जा सके। विभागीय अधिकारियों की मानें तो चुनाव आचार संहिता की वजह से नलकूपों के संचालन में देरी हो गई। अगर आचार संहिता नहीं होती तो शासन से मंजूरी लेकर कार्य शुरू कराया जा चुका होता। अभी आचार संहिता करीब 10 दिन तक और रहेगी। ऐसे में कार्य पिछड़ रहा है।
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128 नलकूपों का करना पड़ा परित्याग
विभागीय अधिकारियों के मानें तो जिला में 128 ऐसे नलकूप हैं, जो किसी न किसी कारण से चालू करने की स्थिति में नहीं है। इन नलकूपों का परित्याग करना पड़ा है, जो कभी संचालित नहीं किए जा सकते।
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375 नलकूपों से कराई जा रही है सिंचाई
जिले में नलकूल विभाग के 375 नलकूप संचालित हैं। 38 को चलित बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद जिला के किसानों को सिंचाई के लिहाज से बेहतर सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाएगी।
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जिला के किसानों को सिंचाई व्यवस्थाएं बेहतर देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में 375 नलकूप चालू स्थिति में हैं, जबकि 38 को रीबोर के लिए चिह्नित कर लिया गया है, जो जल्द संचालित कर दिए जाएंगे।
चंद्र प्रकाश सिंह, अधिशासी अभियंता नलकूप