एटा। मौसम की अनिश्चितता के चलते किसानों ने फसल को समय से पहले काटने में जुटे हैं। गेहूं में बारिश से नुकसान झेल चुके किसान अब मक्का को भी जल्द बेच रहे हैं। मक्के के दानों में नमी है। इसके कारण किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन अधिक नमी के कारण किसानों से आढ़तिया 1500 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच रहे हैं।
जिले में इस वर्ष करीब 7,497 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का की खेती की गई है। बारिश व आंधी से गेहूं की फसले प्रभावित हुई थी। वहीं लगातार मौसम की अनिश्चितता के कारण किसानों को फसल खराब होने का डर सता रहा है। ऐसे में वे मजबूरी में जल्द कटाई कर रहे हैं और नमी वाली मक्का कम कीमत पर बेचने को विवश हैं। सरकारी खरीद शुरू होने से पहले किसानों की निगाहें मौसम और क्रय केंद्रों की व्यवस्थाओं पर टिकी हैं जिससे उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल सके। फसल तैयार होने के साथ ही किसान लगातार मंडी समिति पहुंच रहे हैं। बार-बार बदल रहे मौसम और बारिश की आशंका के कारण अधिकांश किसानों ने जल्द कटाई कर ली जिससे दानों में नमी बनी हुई है। यही नमी किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है। मंडी समिति में इन दिनों मक्का की खरीद गुणवत्ता और नमी के प्रतिशत के आधार पर की जा रही है। नमी जितनी अधिक होती है किसानों को उतना ही कम मूल्य मिलता है।तिदिन दो से ढाई हजार क्विंटल मक्का की आवक हो रही है।
भाेगपुर गांव के भगवान सिंह ने बताया है कि मौसम का कोई भरोसा नहीं है। दो-तीन बार बारिश हो चुकी है। मक्का का सुखाने के दौरान बार-बार उठान पड़ गया। मंडी में नमी बताते हुए 1750 रुपये प्रति क्विंटल के भाव मिले हैं।
सकीट के चरन सिंह की मानें तो मौसम के बदलाव की वजह से गेहूं की फसल को नुकसान हुआ था। अब फिर से मौसम बार-बार बदल रहा है। आए दिन आंधी और बारिश आ रही है। अब नुकसान नहीं झेल सकते। इसलिए मक्का 1800 रुपये क्विंटल के हिसाब से बेची है।
शर्ताें पर कर रहे खरीद
ज्यादा आवक होने के कारण व्यापारी भी अपनी शर्तों पर कीमत तय कर रहे हैं। मंडी में 30 प्रतिशत नमी पर 1,400 रुपये, 20 प्रतिशत नमी पर 1,650 रुपये और पूरी तरह सूखी मक्का का भाव लगभग 2000 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है। यह मूल्य भी एमएसपी से काफी कम है। मंडी आए किसान रुकुमपाल ने बताया कि नमी होने के कारण 50 क्विंटल मक्का 1900 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचनी पड़ी। मक्का बेचने मंडी पहुंचे किसान प्रदीप कुमार वर्मा ने बताया कि बारिश की वजह से गेहूं की फसल खराब हो गई थी अब मौसम परिवर्तन को देखते हुए फसल की जल्दी कटाई कर मंडी में बेच दी है।
भंडारण में आ रही परेशानी
मंडी में आढ़तियों का कहना है कि अधिक नमी वाली मक्का का भंडारण करना बेहद मुश्किल होता है। नमी के कारण दाने जल्दी काले पड़ने लगते हैं और खराब होने का खतरा रहता है। इसी वजह से व्यापारी ऊंचे भाव पर खरीद का जोखिम नहीं उठाते। रूपप सिंह ने बताया कि मक्का को सुखाने के लिए करीब 100 रुपये प्रति क्विंटल की अतिरिक्त मजदूरी खर्च करनी पड़ रही है। मंडी में जगह की कमी भी बड़ी समस्या बनी हुई है।
15 जून से शुरू होगी सरकारी खरीद
जिले में 15 जून से नौ सरकारी क्रय केंद्रों पर मक्का की खरीद शुरू होगी। जिला विपरणन अधिकारी सुभाष कुमार ने किसानों से अपील की है कि वे फसल को खेत में पूरी तरह पकने दें और अच्छी तरह सुखाने के बाद ही बिक्री के लिए मंडी लाएं। उन्होंने कहा कि निर्धारित मानकों के अनुरूप सूखी और अच्छी गुणवत्ता वाली मक्का पर किसानों को 2,400 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य मिलेगा, जिससे उन्हें उचित लाभ मिल सकेगा।
भगवान सिंह
भगवान सिंह