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बैंकों की झोली खाली, किसानों की बढ़ी दुश्वारी

Tue, 22 Nov 2016 11:21 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, एटा
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बैंक के बाहर किसानों का प्रदर्शन
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नोट बंदी के आदेश को 14 दिन हो चुके हैं, लेकिन बैंकों में मांग के अनुसार कैश नहीं मिलने से परेशानी बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों का हाल और भी बुरा है। यहां किसान नकदी के लिए भटक रहे हैं।
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मंगलवार को सकीट स्थित ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त में कैश न मिलने पर किसानों ने हंगामा किया। बैंक प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में अधिकारियों और पुलिस के समझाने पर किसान मायूस होकर लौट गए।

कस्बा सकीट स्थित ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त की शाखा को नोट बंदी के बाद से अब तक दो लाख रुपये कैश मिला है। शाखा में पांच हजार से ज्यादा खाते हैं। किसानों के पास खाद-बीज खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, सारे पुराने नोट बैंक में जमा कर चुके हैं। मंगलवार को किसान जब बैंक पहुंचे, तो एक बार फिर बैंक अधिकारियों ने कैश नहीं होने की बात कही।
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इस पर किसान भड़क उठे। किसानों का आक्रोश बढ़ते देख पुलिसकर्मियों और बैंक अफसरों ने आश्वासन देकर शांत कराया। शाखा प्रबंधक ग्रीश चंद्र जैन ने बताया कि नोट बंदी के बाद से अब तक महज तीन बार में एक लाख, पचास हजार और 80 हजार रुपये आए हैं। क्षेत्रीय कार्यालय को मांग भेजी गई है। कमोवेश यही हालत अलीगंज, सराय अगहत, जैथरा, रिजोर, मलावन, निधौली कलां, जलेसर, अवागढ़, मिरहची और मारहरा का है।

किसान हैं परेशान
गांव बक्सीपुर निवासी किसान अमर सिंह ने बताया कि दो दिन से बैंक से खाली हाथ लौट रहा हूं, पता नहीं कब पैसे मिलेंगे। सकीट निवासी रवेंद्र शाक्य ने कहा ग्रामीण बैंक में कैश नहीं है, फसल बुवाई के लिए पैसे नहीं हैं। शोखपुरा के गोपी चौहान ने कहा रोज लाइन में लग कर खाली लौट रहे हैं, समय बर्बाद हो रहा है।
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