एटा। कासगंज रोड स्थित राजकीय वृद्धाश्रम में आश्रित वृद्धजन की आंखें अपनों के इंतजार में पथरा रहीं हैं। बेबसी के आंसू छलक जाते हैं, लेकिन अपनों ने नजरें ही फेर रखी हैं। इस तिरस्कार से आहत कुछ वृद्धजन ने तो अपनों की आस ही छोड़ दी है।
संतानें बुढ़ापे में सहारा बनेंगी, इस सोच के साथ इन्होंने भी अपने बच्चों की परवरिश की। अंगुली पकड़कर चलना सिखाया। अच्छे स्कूलों में दाखिला कराया। पढ़-लिखकर बच्चे जब जवान हुए तो अपना सबकुछ उनके नाम कर दिया। बड़े अरमानों से शादी की, लेकिन वैवाहिक जीवन के बाद उन्हीं संतानों को माता-पिता भार लगने लगे।
शहर के कासगंज रोड स्थित राजकीय वृद्धाश्रम में वर्तमान में कुल 90 लोग शरण लिए हुए हैं। इनमें 60 पुरुष तथा 30 महिलाएं हैं। वृद्धाश्रम की प्रबंधक ने बताया कि जो भी वृद्ध यहां शरण लेने आते हैं उनकी उचित देखभाल की जाती है। समय-समय पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी कराया जाता है।
चार संतानें फिर भी यहां ठिकाना
परोली निवासी नारायण दास हाथ पैर से कमजोर हो गए हैं। उनके दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। पुत्रियों की शादी हो चुकी है। एक पुत्र अध्यापक है। पुत्र अपनी पत्नियों के साथ घर पर रहते हैं। बताया कि वह बीते तीन वर्षों से वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। बहुएं उन्हें घर पर नहीं रखना चाहतीं। यदि बेटे उनसे मिलने के लिए आते हैं तो बहुएं उनसे लड़ती हैं। इसके चलते बेटे भी मिलने नहीं आते। बात करने के दौरान नारायण दास की आंखों में आंसू थे।
पिता-पुत्र की मौत के बाद हो गईं बेसहारा
आगरा रोड स्थित लालपुर गांव निवासी रामस्वरूप की तीन साल पहले मौत हो गई। उनकी 70 वर्षीय पत्नी रामबेटी की देखभाल की जिम्मेदारी पुत्र उठा रहा था, लेकिन उसकी भी अचानक मृत्यु हो गई। इसके बाद रामबेटी अकेली पड गईं। परिवार वालों ने धोखे से उनकी जमीन गिरवी रख दी। उसके बाद बेसहारा हो गईं।लगभग 2 साल से वृद्धाश्रम में रह रहीं हैं। कोई मिलने तक नहीं आता है।