एटा। किसान धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को जलाना बंद नहीं कर रहे हैं। जबकि प्रशासन की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं, लेकिन इसके बाद भी पराली जलाने की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
ब्लॉक सकीट क्षेत्र स्थित गांव बीगोर व आसपास के खेतों में मंगलवार की देर शाम खेतों में पड़ी पराली को किसानों ने जला दिया। जबकि किसानों की ओर से पराली जलाने से वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। पराली के जलने से निकलने वाले धुएं में हानिकारक गैसें, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सूक्ष्म कण होते हैं, जो हवा की गुणवत्ता को खराब करते हैं। इसके चलते सांस की बीमारियां, आंखों में जलन, और फेफड़ों के संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ने का खतरा बना रहता है।
प्रशासन ने पराली जलाने वालों पर सख्ती दिखाते हुए अब तक जिले में कई किसानों से जुर्माना भी वसूला है। इसके बाद भी कई किसान पराली जलाना जारी रखे हुए हैं। मंगलवार को आग की तेज लपटें दूर से ही दिखाई दे रही थीं, जिससे यह साफ होता है कि किसान नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
जिला कृषि अधिकारी डाॅ. मनवीर सिंह ने बताया कि पराली जलाने वालों पर लगातार जुर्माना लगाया जा रहा है, इसके बाद भी किसान पराली जलाने से नहीं मान रहे हैं। किसानों को पराली का निस्तारण करने के लिए मिट्टी में दबाने की सलाह दी जा रही है।