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Etah News: बारिश में सांपों से रहे सतर्क, डसने पर झाड़-फूंक नहीं उपचार कराएं

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एटा। बारिश के मौसम में सर्पदंश का खतरा बढ़ गया है। हर रोज इमरजेंसी में 5 से 7 लोग एंटी स्नैक वैनम (एएसवी) वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। जुलाई माह के 14 दिनों में मेडिकल कॉलेज में सर्पदंश के 126 मामले आए हैं। डॉक्टरों और एक्सपर्ट की सलाह है कि सर्पदंश के बाद झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें। तत्काल उपचार कराएं तो जान बचाई जा सकती है।
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सीएमओ कार्यालय में तैनात चीफ फार्मासिस्ट सुबोध मिश्रा ने लखनऊ में एएसवी वैक्सीन का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। मास्टर ट्रेनर सुबोध मिश्रा के अनुसार जिले में अधिकांश तीन प्रजाति के जहरीले सांप पाए जाते हैं। इसमें कोबरा, करैत और वाइपर प्रजाति शामिल है। इनके काटने के बाद पीड़ित को तत्काल चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। जहर का असर अधिक फैलने पर एक ड्रिप में 10 एएसवी वैक्सीन भी दी जाती है। जरूरत पड़ने पर दोबारा ड्रिप में भी 10 एएसवी वैक्सीन लगानी पड़ती हैं। उन्होंने बताया कि जून व जुलाई माह में बारिश होने के बाद जमीन के अंदर बिल में अधिक गर्मी होने से सांप बाहर निकलते हैं। वहीं अपनी सुरक्षा को लेकर वह लोगों पर हमला करते हैं। जून से अक्तूबर माह तक सांपों के लिए प्रजनन का समय होता है। इस दौरान वे भोजन और साथी की तलाश में अधिक गतिमान रहते हैं और लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।

व्यक्ति के शरीर में ऐसे असर करता है जहर
मास्टर ट्रेनर सुबोध मिश्रा ने बताया कि कोबरा और करैत एक ही परिवार एलापिडे में आते हैं। वायपर के काटने से हीमोटॉक्सिक जहर फैलता है। इसका जहर पीड़ित के शरीर में रक्त नलिकाओं पर असर करता है। इससे खून की नलियां टूट जाती है जिससे किडनी तक फैल हो जाती है। इसके काटने से शरीर से लगातार रक्तस्राव होता रहता है। कोबरा और करैत के काटने से न्यरोटॉक्सिक जहर फैलता है। इसका जहर पीड़ित के शरीर में तंत्रिका तंत्र पर असर करता है। इससे फेफड़े लॉक हो जाते हैं और पीड़ित को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। इसके बाद पीड़ित की मौत हो जाती है।
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स्वास्थ्य विभाग में 2800 और मेडिकल कॉलेज में 200 एएसवी वैक्सीन उपलब्धः
सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि एएसवी सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध हैं। इसके साथ ही वैक्सीन भंडार में भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग में 2800 से अधिक एएसवी उपलब्ध हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज में करीब 200 एएसवी उपलब्ध हैं ।
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सांप काटने के लक्षणः
- पीड़ित की आंखों के पलक भारी हो जाते हैं।
- आवाज लड़खड़ाने लगती है और आवाज में बदलाव आ जाता है।
- खाना या पानी निगलने में दिक्कत होना।
- आंखों के सामने धुंधलापन सा होना।
- सांस लेने में दिक्कत होना।

इन बातों का रखें ध्यान-
- पीड़ित को घबराने न दें। बीपी और धड़कन बढ़ने से जहर तेजी से फैलता है।
- काटे गए हिस्से को बिल्कुल हिलने न दें। इसे दिल के स्तर से नीचे रखें।
- पीड़ित को तत्काल आधा घंटे के अंदर नजदीकी सीएचसी या पीएचसी पर बाइक से लेकर पहुंचे।
- पीड़ित को गर्म चाय का सेवन कराएं।
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