एटा। सभासद के भाई हामिद अली की हत्या अचानक नहीं हुई। पूर्व नियाेजित ढंग से षड्यंत्र के तहत की गई है। ऐसे स्थान पर उन्हें गोली मारी गई जहां आसपास कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं थे। साथ ही यहां सुनसान भी रहती है। इसकी जानकारी हत्यारों को थी। गोली शरीर से लगभग सटाकर मारी गईं। हत्यारों के इसी षड्यंत्र और उद्देश्य को उजागर करने में पुलिस जुटी हुई है।
शाम करीब 6.30 बजे हामिद मारहरा गेट स्थित अपने घर से निकले थे। मालगोदाम रोड पर स्थित नलकूप के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में उन्हें आखिरी बार शाम 6.47 मिनट पर देखा गया। वह आराम से टहलते हुए जा रहे थे। इसके आगे कोई कैमरे नहीं हैं। साथ ही आगे आबादी क्षेत्र भी नहीं है। स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही न होने के कारण अधिकांश समय सूनसान रहती है। स्टेशन के आगे गांव और वीरान इलाके हैं। यहां से बड़े ही आराम से फरार हुआ जा सकता है।
इन सब तथ्यों को हत्यारे जानते थे। इसी वजह से उन्होंने हत्या के लिए रेलवे स्टेशन के नजदीक इस स्थान को चुना। करीब 7.30 बजे लोगों की सूचना पर जीआरपी ने शव को उठाकर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। वहां गोली लगने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस के आला अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। मृतक की पहचान उसकी जेब में मिले पहचानपत्रों के आधार पर हुई। हामिद अली की शादी लगभग चार साल पहले सोनम से हुई थी। एक बच्चा हुआ जिसने तुरंत दम तोड़ दिया। इसके बाद अन्य कोई बच्चा नहीं हुआ। मृतक पांच भाई थे, अब चार रह गए हैं।
100 से अधिक बार किए गए कॉल
शाम को टहलने निकले हामिद अली जब काफी देर तक वापस घर नहीं आए तो परिवार वालों को चिंता हुई। उनके बारे में पता करने के लिए उनके मोबाइल नंबर पर कॉल मिलाया। कफील अहमद ने बताया कि सभी परिजन ने 100 से अधिक बार कॉल किए लेकिन किसी का जवाब नहीं मिला इस पर चिंता बढ़ती गई। बाद में 10.15 बजे जीआरपी की ओर से सूचना मिली।
मां, भाभी और अब भाई हैं सभासद
नगर पालिका में इस परिवार का प्रतिनिधित्व लंबे समय से रहा है। 2007 में इनकी मां मजीतन बेगम सपा के टिकट पर चुनाव जीतकर सभासद बनी थीं। इसके बाद 2017 में कफील अहमद की पत्नी शबनम और 2022 में कफील अहमद भाजपा से निर्विरोध सभासद चुने गए। वर्तमान में इनका कार्यकाल चल रहा और ये सभासद संघ के अध्यक्ष भी हैं।
लूट करना नहीं घटना का उद्देश्य
हत्यारों का उद्देश्य सभासद से लूट करने का बिल्कुल भी नहीं था। जीआरपी ने जब उनकी बॉडी बरामद की तो गले में सोने की चेन, अंगूठी पहने हुए थे। पास में 2810 रुपये और मोबाइल था। जीआरपी थाना प्रभारी ने बताया कि मौके से दो खोखे बरामद हुए हैं। ये किसी रिवाल्वर या पिस्टल के प्रतीत हो रहे हैं। इनकी जांच कराई जा रही है।
नहीं पता था किसी को मोबाइल का पासवर्ड
मृतक के मोबाइल की जांच-पड़ताल के लिए उसका खोलना जरूरी था लेकिन इसमें स्क्रीन लॉक लगा हुआ था। पत्नी व भतीजों को बुलाकर प्रयास कराया गया लेकिन इन लोगों को भी पासवर्ड नहीं पता था। इस स्थिति में साइबर टीम द्वारा तकनीकी तरीके से लॉक खोलने का प्रयास शुरू किया गया।
वर्जन
घटना को पूर्व नियोजित ढंग से अंजाम दिया गया है। इसका खुलासा करने के लिए तकनीकी पहलुओं पर मशक्कत की जा रही है। मृतक के मोबाइल, कॉल डिटेल, व्हाट्सएप चैट से काफी महत्वपूर्ण मिल सकती हैं। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की भी लगातार जांच की जा रही है।
- श्याम नारायण सिंह, एसएसपी