एटा। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ के गर्भ कल्याणक पर नगर के मंदिरों में शुक्रवार को श्रद्धा व भक्ति का विशेष माहौल रहा। सुबह जहां विभिन्न जिनालयों में अभिषेक-पूजन हुआ वहीं शाम 7 बजे पुरानी बस्ती स्थित बड़ा जैन मंदिर भक्ति और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।
पुन्यार्जक सुजया जैन, अंबुज जैन वैद्य परिवार की ओर से भव्य भक्तामर दीप अर्चना का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्री भक्तामर स्तोत्र, श्री आदिनाथ स्तोत्र, गणधर वलय स्तोत्र एवं ऋद्धि मंत्रों के उच्चारण से हुआ। मौजूद श्रावकों ने गहन श्रद्धा के साथ अड़तालीस दीप भगवान के समक्ष समर्पित किए।
जैन महिला संगठन की अध्यक्षा बबिता जैन प्रेरणा ने बताया कि भक्तामर स्तोत्र 48 छंदों का दिव्य शास्त्र है। आचार्य श्री मानतुंग स्वामी पर उज्जैन के राजा ने लगाए गए अड़तालीस ताले भक्ति की पराकाष्ठा से स्वयं टूट गए थे। उसी कालजयी घटना से प्रेरित होकर भक्तामर दीप अर्चना साधक को शारीरिक, मानसिक व सांसारिक बाधाओं से मुक्ति प्रदान करने वाली मानी जाती है।
मंगल आरती के पश्चात जन्म कल्याणक महिला मंडल की ओर से चौबीसों तीर्थंकरों की जन्म कल्याणक तिथियों पर श्री नेमिनाथ जिनालय में सुबह विधान और शाम को भक्तामर दीप अर्चना कराने के संकल्प पर दिगंबर जैन पद्मावती पुरवाल पंचायत कमेटी ने मंडल को सम्मानित किया। जैन समाज की बेटियां डॉ. माना जैन व डॉ. अणिमा जैन को पीएचडी डिग्री प्राप्त होने पर सभी ने उनका सम्मान किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। पंचायत अध्यक्ष योगेश जैन, मंत्री शैलेंद्र शैली, धवल जैन, उमेश जैन, प्रफुल्ल जैन, अर्चना जैन, रुचि जैन, लवली जैन, राजमती जैन, शोभना जैन, गरिमा-शानू जैन, अंजलि जैन, अनीता जैन समेत सैंकड़ो श्रावक-श्राविकाओं ने मौजूद होकर दीप अर्पित किए और अनुष्ठान का पुण्य लाभ लिया। कार्यक्रम देर शाम तक जय-जयकार और धर्मभक्ति के साथ चलता रहा। संवाद