राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में मरीज को दवाएं लिखते चिकित्सक। संवाद
एटा। हर साल 10 अप्रैल को डॉ. सैमुअल हैनीमैन के जन्मदिन के अवसर पर विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। मेडिकल कॉलेज के एमसीएच विंग में संचालित राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल में विभिन्न बीमारियों का उपचार लेने के लिए 100 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल के डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि होम्योपैथी दवाइयां अक्सर छोटी और मीठी गोलियों के रूप में आती हैं। इन दवाओं के नियमित सेवन से मरीज अपनी बीमारी को जड़ से खत्म कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि रोजाना 100 से अधिक मरीज सर्दी, खांसी, बुखार के साथ चर्मरोग, माइग्रेन, डायबिटीज समेत अन्य बीमारी का उपचार लेते हैं। उन्होंने बताया कि होम्योपैथी का मूल सिद्धांत है कि जैसा रोग, वैसा इलाज। इसका अर्थ यह है कि कोई भी पदार्थ जो स्वस्थ व्यक्ति में किसी रोग के लक्षण पैदा कर सकता है, वही पदार्थ बीमार व्यक्ति में उस रोग का इलाज करने में मदद करता है।
जब हम होम्योपैथिक दवा लेते हैं, तो यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करती है और रोगों को जड़ से ठीक करने में मदद करती है। इसे केवल लक्षणों को दबाने वाली दवा नहीं माना जाता, बल्कि यह पूरी तरह से शरीर की अंदरूनी शक्ति को जगाकर बीमारी से मुकाबला करने में मदद करती है।
क्यों होती हैं छोटी-मीठी गोलियां
होम्योपैथिक दवाइयां आमतौर पर छोटी और मीठी गोलियों के रूप में बनाई जाती हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि इन्हें आसानी से निगला जा सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और संवेदनशील मरीजों के लिए यह तरीका बहुत सुविधाजनक है। गोलियों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री शरीर को नुकसान नहीं पहुंचाती और दवा का असर धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से शरीर पर पड़ता है।