कटरा मोहल्ला स्थित उपकृषि निदेशक कार्यालय पर फार्मर रजिस्ट्री की जानकारी करते किसान। संवाद
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एटा। जिले में फार्मर रजिस्ट्री का सत्यापन समय पर पूरा न होने से हजारों किसानों की परेशानी बढ़ गई है। जिन किसानों ने समय रहते अपना पंजीकरण करा लिया था उनका भी सत्यापन महीनों से लंबित पड़ा है। सत्यापन न होने के कारण किसान रोजाना तहसीलों और लेखपालों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है।
विभागीय पोर्टल के अनुसार जिले में कुल 3,24,764 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री होनी है। इनमें से 2,63,547 किसानों का पंजीकरण हो चुका है, लेकिन 3,400 किसानों की रजिस्ट्री का सत्यापन लेखपालों के यहां लंबित पड़े हुए हैं। जिले की तीनों तहसीलों में 150 से अधिक लेखपाल तैनात होने के बावजूद सत्यापन कार्य अपेक्षित गति से पूरा नहीं हो पा रहा है।
उप कृषि निदेशक सुमित कुमार ने बताया कि प्रदेश स्तर पर फार्मर रजिस्ट्री में जिले को 53वीं रैंक प्राप्त हुई है। अब तक जिले में 81.15 प्रतिशत किसानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 61,217 किसान ऐसे हैं जिनके आधार कार्ड और राजस्व अभिलेख (फर्द) में नाम अलग-अलग दर्ज होने के कारण सत्यापन की प्रक्रिया अटक रही है। किसान रूप किशोर ने बताया कि उनके आधार कार्ड में नाम रूप किशोर वर्मा दर्ज है जबकि फर्द में केवल रूप किशोर लिखा है। इसी नाम के अंतर के कारण उनका सत्यापन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि कई बार तहसील के चक्कर लगाने के बावजूद अब तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
फार्मर रजिस्ट्री सत्यापन में हो रही देरी से किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते लंबित मामलों का निस्तारण नहीं किया गया तो उन्हें भविष्य में सरकारी योजनाओं और अन्य कृषि संबंधी सुविधाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।