मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में मरीजों की आंखें का परीक्षण करते स्वास्थ्यकर्मी। संवाद
एटा। मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। रोजाना 150 से अधिक मरीजों को आंखों की विभिन्न समस्याओं के लिए उपचार दिया जा रहा है। इनमें बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी आंखों पर स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग भारी पड़ रहा है।
नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अनिल बघेल ने बताया कि घरों में बच्चे मोबाइल देखने में अधिक समय बिताते हैं। घंटों रील्स और शॉर्ट वीडियो देखने से उनकी आंखों में सूखापन, जलन और पानी आने जैसी गंभीर समस्याएं हो रही हैं। ओपीडी में रोजाना ऐसे करीब 20 बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। डॉ. बघेल ने समझाया कि सामान्यतः एक इंसान की पलकें एक मिनट में 15 से 20 बार झपकती हैं। हालांकि, स्क्रीन देखते समय यह दर घटकर मात्र पांच से सात बार रह जाती है। पलकें कम झपकने से आंखों में बनने वाले प्राकृतिक आंसू तेजी से सूख जाते हैं। इससे कॉर्निया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बुजुर्गों में आंखों की एलर्जी और मोतियाबिंद की शिकायतें भी बढ़ रही हैं। धूल उड़ने के कारण कई अन्य लोगों को आंखों में खुजली और लालिमा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज का नेत्र विभाग इन सभी मरीजों को उपचार प्रदान कर रहा है।
इन बातों का रखें ध्यानः
- पांच साल से छोटे बच्चों को मोबाइल से दूर रखें।
- किशोरों के लिए भी स्क्रीन टाइन एक घंटे से अधिक न होने दें।
- बच्चों को मोबाइल पर गेम खेलने की बजाय मैदान में खेलने के लिए प्रेरित करें।
- हर मिनट के स्क्रीन टाइम के बाद 20 सेंकेंड का ब्रेक लें।