एटा वालों के लिए खुशखबरी है। एटा-कासगंज रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। इसके लिए 16 गांवों की लगभग 112 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की जाएगी। पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण के लिए शासन से 50 करोड़ रुपये मांगे हैं।
लगभग 7 दशक से जिला रेल लाइन विस्तार के लिए तरस रहा है। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 18 जनवरी 1959 को रेलवे स्टेशन का शुभारंभ किया था। तब से अब तक जिले की जनता लगातार संघर्ष कर रही है। कई सामाजिक संस्थाओं और समाजसेवियों ने लाइन को कासगंज तक बढ़ाने के लिए मुख्यालय से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक प्रदर्शन किया।
कई बार स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधियों ने भी आगे बढ़कर पहल की। यही वजह रही कि पिछले वर्ष कासगंज तक रेल लाइन निर्माण परियोजना को मंजूरी मिली और काम शुरू हो गया। लिडार सर्वे के बाद भूमि का चिह्नांकन हुआ और अब अधिग्रहण शुरू होने वाला है। भूमि अधिग्रहण में आने वाली आपत्तियों के निस्तारण के बाद अब मुआवजे का वितरण किया जाएगा।
अपर जिलाधिकारी प्रशासन सत्यप्रकाश ने बताया कि रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहीत की जानी है। इसी के तहत किसानों को जो मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए 50 करोड़ रुपये की मांग शासन को भेजी गई है। यह धनराशि आने के बाद 2025-26 वित्तीय वर्ष में किसानों को मुआवजा राशि वितरित की जाएगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया होगी।