सत्ता के महासंग्राम में हमेशा से दोस्त दुश्मन और शत्रु-मित्र बनते रहे हैं। पर, दलों का यह गठबंधन एटा के लोगों को कम ही रास आता रहा है। जिले में कांग्रेस-बसपा 1996 और बसपा-सपा 1993 में गठबंधन के दस प्रत्याशी चुनाव में उतर चुके हैं। पर, जीत सिर्फ तीन प्रत्याशियों को ही मिल सकी है।
देखें तो जिले में 1993 में सपा और बसपा गठबंधन ने चुनाव लड़ा था। उस वक्त जिले में पांच विधानसभा सीटें थीं। अलीगंज से बसपा प्रत्याशी अवधपाल सिंह, निधौली से मुलायम सिंह यादव और जलेसर से रघुवीर सिंह जाटव चुनाव जीते थे। सकीट विस से सपा प्रत्याशी राजेंद्र पाल, एटा से सपा प्रत्याशी अतर सिंह को हार सामना करना पड़ा था। वर्ष 1996 के चुनाव में कांग्रेस-बसपा गठबंधन से चुनाव में पांच प्रत्याशी उतरे।
एटा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद गुप्ता, अलीगंज से बसपा प्रत्याशी सत्यपाल सिंह राठौर, सकीट से भूपसिंह राठौर बसपा, निधौली से अनिल यादव कांग्रेस, जलेसर से बसपा प्रत्याशी महिलापाल बाल्मीकि समेत सभी को हार का सामना करना पड़ा था।
इधर, इस बार विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस-सपा का गठजोड़ हुआ है। इसमें जिले में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है। जबकि राहुल गांधी की खाट सभा को मिले समर्थन से दावेदार और कार्यकर्ता दोनों उत्साहित थे। दावेदारों ने चुनाव तैयारियों में लाखों रुपये फूंक भी दिए थे। सीट नहीं मिलने से वे मायूस हैं। हालांकि कांग्रेस के जिला अध्यक्ष चोबसिंह धनगर कहते हैं कि गठबंधन से प्रदेश में पार्टी को मजबूती मिलेगी। दावा किया कि एटा और मारहरा के प्रत्याशियों संग बैठक के बाद हम चुनाव प्रचार के लिए क्षेत्र में लगे हैं।