पर्यावरण पर भदुआ में सूखे पड़े पौधे ।
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एटा। पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस है। जिले में पेड़ काटकर हाईवे और फोरलेन बनाए गए। एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) की ओर से जीटी रोड को फोरलेन किया गया। इसके साथ ही बाईपास का निर्माण भी हुआ। इससे पहले कासगंज रोड का निर्माण कराया गया। इन तीनों परियोजनाओं में करीब सात हजार पेड़ काट दिए गए। लेकिन इनके स्थान पर पौधे लगाने के लिए प्राधिकरण ने जगह का अभाव बताकर हाथरस और फिरोजाबाद में पौधे लगा दिए। एटा के हिस्से की हरियाली दूसरे जिलों में पहुंच गई।
बाईपास निर्माण और जीटी रोड चौड़ीकरण में सड़क किनारे लगे 4747 पेड़ों को काटा गया। इससे पहले साल 2018-19 में एटा-कासगंज रोड निर्माण के दौरान 2392 पेड़ काटे गए। लेकिन काटे गए पेड़ों के बदले में जिले में एक भी पौधा नहीं लगाया। वन विभाग के रेंजर सुदेश भारती ने बताया कि जिले में पौधे लगाने के लिए जगह नहीं होने की वजह से करीब एक लाख पौधे फिरोजाबाद और हाथरस में लगाए गए हैं।
रेंजर सुदेश भारती ने बताया कि 2011 की गणना के अनुसार जिले का कुल क्षेत्रफल करीब 5444 किलोमीटर वर्ग है। वहीं वन विभाग का क्षेत्रफल जिले के क्षेत्रफल का करीब 1.8 फीसदी है जो करीब 97.99 किलोमीटर वर्ग है। लेकिन वर्तमान में जिले में हाईवे, सड़क निर्माण के दौरान पेड़ कटने से जिले के वन क्षेत्र पर असर पड़ा है। पेड़ कटने की वजह से दो फीसदी वन क्षेत्र कम होकर अब करीब 95 किलोमीटर वर्ग का ही क्षेत्र वन क्षेत्र बचा है।
वन विभाग की ओर से पिछले साल वृहद स्तर पर वृक्षारोपण किया गया। इस दौरान प्रशासन ने गांव भदुआ में करीब 15 हजार पौधे रोपित किए थे। लेकिन पांच माह बीतने के बाद ही यहां पर लगे करीब 15 हजार पौधे दम तोड़ गए। कारण पेड़-पौधों की ठीक से देखरेख नहीं की गई जिसकी वजह से पौधे सूख गए।