काली नदी के पानी से दुर्गंध उठ रही है। जलनिगम द्वारा नदी का पानी रोकने से किसानों की हजारों बीघा फसल नष्ट हो चुकी है। आसपास के 12 से ज्यादा गांव के लोग दुर्गंध से बीमारी हो रहे हैं। वहीं बौद्ध स्थल अतरंजी खेड़ा स्थित पीर बाबा की मजार पर आने वाले जायरीन परेशान हैं।
गांव अतरंजी खेड़ा अचलपुर पर बने काली नदी के पुल के आसपास नदी का पानी एकत्रित होने से पानी में दुर्गंध उठने लगी है। ग्रामीणों ने नदी के पानी में रासायनिक तत्व मिले होने की संभावना जताई। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले छह महीने से जलनिगम ने इस नदी का पानी बेवर बैराज के पुल पर चल रहे नहर निर्माण के कार्य के चलने के कारण फाटक गिराकर रोक दिया है। पानी किसानों की फसल में घुसने लगा है जिससे हजारों बीघा फसल नष्ट हो चुकी है।
इस दुर्गंध से नदी किनारे बसे गांव अचलपुर, कल्यानपुर, बुरहनाबाद, सिकन्दराबाद, नगला बांस, अमीरपुर, सलेहपुर एवं डोर्रा के लोगों का कहना है कि दिन की अपेक्षा रात में नदी के पानी से तेज दुर्गंध आती है जिससे लोगों को सांस लेना भी मुश्किल होता है। ग्रामीणों ने पिछले माह कासगंज बारह पत्थर मैदान में प्रदर्शन कर डीएम से फसलों के मुआवजे की मांग उठाई थी।
गांव डोर्रा निवासी शकील अहमद ने बताया कि 20 साल पूर्व आसपास के गांव के सभी ग्रामीण इस नदी के पानी को नहाने और पीने के उपयोग में लेते थे और अपने पशुओं को भी पानी पिलाते थे। डोर्रा के ही किसान सूबेदार की नदी किनारे सात बीघा जमीन है, छह माह से नदी का पानी फसल में पहुंच जाने से फसल खराब हो गई है। हुसैन पीर की दरगाह के सेवक मोहम्मद इस्लाम का कहना है कि नदी के पानी से उठने वाली दुर्गंध से लोगों को घबराहट होती है। जायरीन तो दरगाह पर दो मिनट ही रुककर चले जाते हैं।
ऐसी शिकायत अभी तक नहीं आई है। न ही ऐसी बीमारी के मरीज पीएचसी तक आए हैं। फिर भी गांव में स्वास्थ्य टीम भेजकर लोगों का उपचार कराया जाएगा।
- डा. पीके मिश्रा, प्रभारी चिकित्साधिकारी पीएचसी
नदी में पानी फाटक से नहीं रुका है बल्कि नालों के चोक होने से रुका हुआ है। नालों की सफाई करा दी जाएगी तो नदी का पानी सुचारु हो जाएगा। ग्रामीणों की समस्याओं पर फोकस किया जा रहा है ।
- रामकिशन, अधिशासी अभियंता