विकास खंड में रोजगार सेवकों व मनरेगा कर्मचारियों ने वीडियों को सौंपा ज्ञापन। स्रोत स्वयं
एटा। ग्राम रोजगार सेवकों व मनरेगा कर्मचारियों ने लंबित मानदेय व ईपीएफ भुगतान को लेकर गंभीर नाराजगी जताते हुए खंड विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने बताया कि बीते 10 माह से उनका मानदेय बकाया है वहीं दो वर्षों से ईपीएफ की राशि भी खातों में जमा नहीं की गई जिससे उन्हें भारी आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है।
सकीट व निधौली कलां ब्लॉक ग्राम रोजगार सेवकों ने ज्ञापन में कहा कि मनरेगा कार्यों के साथ-साथ उन्हें चुनावी ड्यूटी, बीएलओ कार्य, एसआईआर, फैमिली आईडी बनाने, लोकसभा–विधानसभा चुनाव में कैमरामैन ड्यूटी व सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार जैसे अनेक अतिरिक्त कार्य दिए जाते हैं जिनका वे समय से अनुपालन करते हैं। इसके बावजूद मानदेय भुगतान ग्राम पंचायतवार कंटीन्जेंसी के आधार पर असमान रूप से किया जा रहा है जिससे कई रोजगार सेवकों को 10 माह में मात्र 1-2 महीने का ही मानदेय मिल पाएगा।
कर्मचारियों ने मांग की कि मार्च 2026 तक का पूरा मानदेय एकमुश्त भुगतान किया जाए जिससे लगातार चल रहे आर्थिक संकट से उन्हें राहत मिल सके। वहीं विकासखंड निधौली कलां में ग्राम रोजगार सेवकों ने मानदेय भुगतान में अनियमितता के विरोध में सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। रोजगार सेवकों का कहना है कि खंड विकास अधिकारी गोपाल गोयल ने किसी को एक माह, किसी को दो माह तो किसी को मनमुताबिक भुगतान करने की बात कही, जिससे नाराज होकर सभी रोजगार सेवकों शशि कुमारी, रजनीश कुमार, योगेश कुमार, जयप्रकाश, शरद यादव, वीरेश कुमार, पलिया और मीरा देवी सहित अन्य लोगों ने लिखित रूप में सामूहिक इस्तीफा दे दिया।
सेवकों ने आरोप लगाया कि मुख्य कार्यों से हटाकर निरंतर विभिन्न योजनाओं का भार बढ़ाया गया लेकिन मानदेय समय पर न मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को भेजी गई है।