मंगलवार की रात जिलाधिकारी निधि केसरवानी के निर्देश पर एसडीएम सदर और पुलिस ने अलीगंज तिराहे पर छापा मारकर गेहूं से भरे आठ ट्रकों को पकड़ा है। प्रशासन की कार्रवाई होती देख सभी ट्रकों के चालक और क्लीनर मौके से भाग गए। बुधवार सुबह प्रशासन द्वारा इसकी जांच सप्लाई इंस्पेक्टर और तहसीलदार को सौंपी गई, लेकिन देर सायं तक प्रशासनिक अधिकारी मामले को पूरी तरह से दबाते नजर आए। आशंका है कि पकड़ा गया गेहूं कालाबाजारी को ले जाया जा रहा था, जबकि प्रशासन अभी मामले की जांच करने की बात कह कर पल्ला झाड़ रहा है।
सूत्रों की मानें तो जिलाधिकारी को गेहूं की कालाबजारी की सूचना मिली थी। इसे संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर अजीत कुमार सिंह को छापामार कार्रवाई के निर्देश दिए। इस पर एसडीएम सदर ने पुलिस की मदद से गेहूं से भरे आठ ट्रकों को अलीगंज तिराहे पर पकड़ लिया, लेकिन सभी चालक व क्लीनर भागने में सफल रहे। एसडीएम सदर द्वारा किसी कार्य के लिए अवकाश पर चले जाने पर इसकी जांच तहसीलदार व सप्लाई इंस्पेक्टर को सौंपी गई। जब सप्लाई इंस्पेक्टर गौतम से बात हुई तो उन्होंने बताया कि देर सायं तक मामले की जांच चलेगी। इसके बाद ही वह कुछ कह पाएंगे। उन्होंने जानकारी दी कि आठ ट्रकों में से सात ट्रक एफसीआई से निकले हुए थे। जो सकीट व अलीगंज के गोदाम जा रहे थे। जहां इनको राशन के काम में लिया जाना था। वहीं बचे एक ट्रक की जांच की जा रही है कि यह कहां से आया है। उन्होंने बताया कि पल्लेदारों को बुलाकर ट्रकों में भरे गेहूं की बोरों की गिनती की जा रही है। इसके बाद सायं को मोबाइल पर कई बार उन्हें संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। जिला पूर्ति अधिकारी से भी बात की गई, लेकिन उन्होंने जांच टीम में न होने का पल्ला झाड़ लिया। डीएम भी बोलीं, अभी तहसीलदार से रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बताया जा सकेगा।
कार्रवाई सवालों के घेरे में
एटा। गेहूं से भरे ट्रकों पर चली कार्रवाई सवालों के घेरे में रही। लोग दिनभर यह कयास लगाते रहे कि यदि आठ में से सात ट्रक एफसीआई गोदाम से निकले हैं, तो उनमें से एक ट्रक कहां से निकला है, और उन सात ट्रकों के जत्थे में वह कहां जा रहे थे। यदि गेहूं गोदामों पर ही जा रहे थे तो चालक और क्लीनर वहां से भागने की जरूरत क्या थी। इसके अलावा गेहूं का वारदाना भी वर्ष 2012-13 का नजर आ रहा है। इसके चलते लोग कालाबाजारी की आशंका भी व्यक्त कर रहे हैं।
ऐसे होती है कालाबजारी
एटा। जिले में कुछ व्यापारी गेहूं का अवैध रूप से कारोबार कर रहे हैं। जो राशन डीलरों व किसानों से सस्ता गेहूं खरीद कर स्टॉक करते हैं, और उन्हें बाहर के लिए सप्लाई करते हैं। इस दौरान वे विभागीय अधिकारियों से साठगांठ कर नकली कागज बनावा लेते हैं। जानकारों की मानें तो जब तक शहर में उनकी गाड़ी रहती है, उनके कागज एफसीआई की सप्लाई के होते हैं, और शहर के बाहर जाकर वे मंडी व्यापारियों का गेहूं बताते हैं।
इससे पहले भी पकड़े जा चुके हैं मामले
- दो साल पहले मिरहची में एक व्यापारी के यहां सैकड़ों क्विंटल गेहूं पकड़ा गया था
- कई साल पहले तत्कालीन डीएम आरपी शुक्ला ने पिलुआ थाना क्षेत्र में गेहूं से भरे कई ट्रक पकड़े थे, जिनके कागजात फर्जी पाए गए थे
- मंडी समिति में कुछ माह पूर्व एसडीएम ने एक चावल का ट्रक पकड़ा था