राजकीय इंटर कालेज परिसर में शुक्रवार को द्वितीय पुस्तक मेले का शुभारंभ करते हुए डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि शिक्षित व्यक्ति के लिए पुस्तकों से बड़ा कोई तोहफा नहीं। आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि पिछड़े जिले में ऐतिहासिक शुरुआत है। गांधी जी की आत्मकथा का संस्मरण सुनाते हुए कहा कि 1925 में राष्ट्रपिता के जीवन में जॉन रस्किन की पुस्तक अनटू द लास्ट से ऐसा परिवर्तन आया कि वह देश को समर्पित होकर आजादी के नायक बन गए।
दिल्ली के उपराज्यपाल के ओएसडी अजय चौधरी ने कहा कि पुस्तक मेला वैचारिक एवं शैक्षिक समृद्धता का प्रतीक है। मेले के आयोजक संजीव कुमार को साहित्यिक संगम का भागीरथ बताते हुए कहा कि अपराध, पिछड़ेपन के लिए बदनाम जिले की छवि बदलने के साथ भ्रांतियां दूर होेंगीं। भारत विकास परिषद के स्टाल पर विशाल अग्रवाल द्वारा भेंट पुस्तक की प्रशंसा की। आयोजन समिति के अध्यक्ष संजीव कुमार ने कहा कि पाठकों की भीड़ से प्रकाशकों के साथ सभी का हौसला बढ़ा है। पद्म विभूषण डॉ रामसिंह, पर्यावरणविद डॉ ज्ञानेंद्र रावत, साहित्यकार प्रो. प्रेमीराम मिश्र, डॉ राकेश सक्सेना प्राचार्य, डॉ विनीता तिवारी, डॉ रामनिवास यादव, गुमान सिंह यादव, राजीव यादव बाबी, किरन यादव मौजूद रहे।
-----------
परिवार के साथ खरीदूंगा ढेर सारी पुस्तकें
मेले में पहुंचे डेढ़ दर्जन से अधिक प्रकाशकों की हजारों पुस्तकें साहित्यकारों, युवाओं और बच्चों का आकर्षण बन गईं। डीएम ने प्रकाशकों के काउंटर पर पहुंचकर पुस्तकें देखीं और बात कर युवा पाठकों को प्रेरित किया। कुछ प्रकाशकों द्वारा पुस्तक भेंट करने पर डीएम ने कहा कि अभी नहीं परिवार के साथ आकर ढेर सारी पुस्तकें खरीदूंगा ।
-----------
जिले के साहित्यकारों का अलग स्टाल
मेले में देशभर के डेढ़ दर्जन से अधिक प्रकाशकों के स्टाल थे वहीं जनपदीय साहित्यकारों द्वारा लिखित पुस्तकें भी पाठकों का आकर्षण रहीं। इनमें डॉ रामसिंह, ज्ञानेंद्र रावत, डॉ महावीर द्विवेदी, राजू उपाध्याय प्रमुख हैं।