एटा। महिला एवं बाल विकास में कार्यरत एक कर्मचारी की पत्नी ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बन गई। इसके लिए फर्जी आय व मूल निवास प्रमाणपत्र बनवाए गए। इस तरह की शिकायत संबंधित वार्ड के सभासद ने डीएम से की है। इस पर जांच शुरू हो गई है।
मामला शहर के वार्ड नंबर 24 महाराणा प्रताप नगर का है। मार्च में हुई नियुक्ति प्रक्रिया में इस वार्ड पर ज्योति सक्सेना का चयन हुआ। ज्योति ने इस मोहल्ले का मूल निवास प्रमाणपत्र और 56 हजार रुपये का वार्षिक आय प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। इसी वार्ड के सभासद अखिलेश दीक्षित ने डीएम प्रेम रंजन सिंह को लिखित शिकायत देकर साफ कहा है कि ज्योति उनके वार्ड में रहती ही नहीं हैं। वह जनपद कासगंज की रहने वाली हैं। महाराणा प्रताप नगर का मूल निवास फर्जी है।
उनके पति इसी विभाग में लालपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर संविदा पर तैनात हैं। इनका मानदेय 10 हजार मासिक से अधिक है। इसलिए ज्योति का आय प्रमाणपत्र भी फर्जी है। फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर उन्होंने नियुक्ति प्राप्त की है। प्रमाणपत्र निरस्त करने के साथ ही इन्हें जारी करने अधिकारियों, कर्मचारियों पर कार्रवाई की भी मांग सभासद ने की है।
कैसे जारी हुए गलत प्रमाणपत्र
मामले की शिकायत आने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नौकरी पर तो तलवार लटक गई है लेकिन जांच की बात यह है कि गलत प्रमाणपत्र आखिर जारी कैसे हुए? जब महिला यहां रहती ही नहीं है तो उसके मूल निवास और आय प्रमाणपत्र बनाने के लिए स्थलीय निरीक्षण की रिपोर्ट कैसे लग गई?
मामला जानकारी में आया है। यदि राजस्व विभाग से आय व निवास प्रमाणपत्र निरस्त किए जाते हैं तो नियुक्ति निरस्त कर चयन प्रक्रिया दोबारा कराई जाएगी। - संजय कुमार सिंह, डीपीओ