मारहरा/मिरहची। फलों के राजा आम की मिठास मध्यप्रदेश, राजस्थान, दिल्ली सहित अनेक प्रांत में मांग दिनों दिन बड़ रही है। आम की पैदावार के लिए प्रख्यात इस क्षेत्र में इस बार आम की बंपर पैदावार होने से बागवानों के चेहरे खिले हुए हैं। बागवानों को पिछले साल की अपेक्षा इस बार अच्छा मुनाफा होने की आस है।
मारहरा और मिरहची क्षेत्र में काफी बड़े-बड़े आम के बाग हैं, इनमें कुछ बाग 25-25 बीघा में फैले हुए हैं। विभिन्न प्रकार के आम की पैदावार से यह क्षेत्र देश के विभिन्न प्रांत में पहचान बनाए हुए है। आस पास के जिलों के साथ ही इस क्षेत्र के आम की मिठास दिल्ली, जोधपुर, जयपुर, अजमेर, ग्वालियर, इंदौर सहित अनेक महानगरों में पहुंच रही है। मिठास पहुंचने के साथ ही यहां के आम की मांग दिनों दिन बढ़ रही है।
आम की इन प्रजातियों की पैदावार
क्षेत्र के गांव नगला चोइया, सिकतरा, गढ़ौली, मुहम्मदपुर, बुड़ेन, ततारपुर के बागों में दशहरी, देसी, कलमी, लंगड़ा, टिकारी, बंबई, चौंसा, फजली आदि प्रजातियों के आम की पैदावार होती है। यहां का दशहरी और चौंसा प्रजाति का आम अपने स्वाद और वजन के चलते काफी पसंद किया जाता है। इसलिए दशहरी और चौसा प्रजाति के आम की बड़े पैमाने पर की जाती है।
शुरुआती दौर में ही आम से लदे वृक्षों को देखकर बेहतर मुनाफा की आस थी, लेकिन तीन दिन से लगातार आई तेज आंधी में फल के गिरने से व्यापारिक लाभ की उम्मीद कम है।
गंगाराम, बागवान
पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार अच्छी पैदावार होने की उम्मीद थी। रोगों लगने से फसल के बचने पर आंधी ने उनकी उम्मीद पर पानी फेर दिया है।
रामनिवास, बागवान
चिकित्सकों की सलाह
फलों के राजा आम के मौसम में हर कोई इसका स्वाद लेना चाहता है। रसायनों से आम पकाने पर लिवर, किडनी, आंत सहित लोगों में कैंसर की समस्या हो रही है। इसलिए लोगों को प्राकृतिक आम ही खाने चाहिए। - डॉ. रविरंजन यादव, चिकित्सा प्रभारी मिरहची
रामनिवास
रामनिवास
रामनिवास