किसान तेजगिरी, किताब सिंह को उम्मीद थी बची टमाटर की फसल को मंडी में बेचकर बिटिया के हाथ पीले कर देंगे लेकिन बेटी को विदा करने से पहले वो खुद ही चल बसे। मृतक जितेंद्र और तेज गिरि चाचा-भतीजे हैं, जबकि किताब सिंह तेज गिरि के बड़े भाई लगते हैं। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत से पूरे गांव में मातम छा गया। किसी भी घर में चूल्हे नहीं जले। सन्नाटा पसर गया। पूरा गांव जिला अस्पताल पहुंच गया था।
पोस्टमार्टम गृह पर पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि मृतक तेजगिरि अपनी बेटी अमृता के लिए कुछ महीनों पहले ही आगरा में शादी के लिए लड़का देखकर आया था और उम्मीद थी कि इस बार नौ बीघा में बोई गई गेहूं की फसल को बेचकर उसके हाथ पीले कर देंगे। गेहूं की फसल बर्बाद हो गई और आखिरी उम्मीद टमाटर की फसल पर टिकी थी। वह भी हादसे की भेंट चढ़ गई। मृतक तेजवीर की तीन बेटी हैं। किताब सिंह भी बेटी की शादी के लिए अभी से तैयारी में जुटे थे। जिसे लेकर यह भी कुछ महीनों पहले ही लड़का देखकर आए थे। घटना के बाद पूरे गांव में सन्नाटा छा गया। हर कोई गांव में पूरी तरह से मातम छा गया। एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद ग्रामीणों के पैरों तले जमीन खिसक गई। प्रधान रामवीर सिंह जग्ग और अन्य लोग भी गांव मधुपुरा पहुंचे।
बेटा आज तू ही देख लेना
जितेंद्र के पिता कैलाश ने बताया कि टमाटर बेचने मंडी पहले वही जाते थे, लेकिन शनिवार को उन्होंने बेटे जितेंद्र को ही भेज दिया, मगर उन्हें क्या पता था कि यह दिन बेटे की जिंदगी का आखिरी दिन बन जाएगा।
जिला अस्पताल में मची अफरा-तफरी
दुर्घटना के बाद जिला अस्पताल में एक साथ पहुंचे 17 घायल और गांव की भीड़ के चलते अफरा तफरी मच गई। इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सकों के अलावा अन्य चिकित्सक और कर्मचारी बुलाए गए। हाल ये था पलंग भी कम पड़ गए। घायलों को लोग गाड़ी के अलावा पैदल, रिक्शा और अन्य साधन से लेकर पहुंचे। बाद में गंभीर घायलों को आगरा रेफर किया। मौके पर सदर विधायक आशीष यादव आशू, जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव और अन्य पार्टी के नेता भी अस्पताल पहुंचे और घटना के बारे में जानकारी ली।