दरियावगंज की झील के अस्तित्व पर अब संकट मंडरा रहा है। झील सूख चुकी है। मेहमान परिंदों के झुंड भी झील का रास्ता छोड़ते जा रहे हैं। शिशिर ऋतु के साथ ही झील पर विदेशी मेहमान परिंदे और इलाकाई परिंदे डेरा जमा ले लेते थे। पक्षियों का कलरव लोगों को आकर्षित करता था। झील पर अब यह सब दिखाई नहीं देता।
इस विशाल झील की परिधि 7 किलोमीटर है। जबकि पूरा झील क्षेत्र 101 हेक्टेयर का है। झील का मुख्य आकर्षण वर्षों से देशी विदेशी मेहमान परिंदे रहे हैं। वहीं कमल नाल झील में चारों ओर खूबसूरती का नजारा देती थी। कमल के फूल भी लोगों को आकर्षित करते थे। पिछले तीन वर्षों में क्षेत्र में कम वर्षा का होना भी झील के सूखने का एक कारण माना जा रहा है। झील का क्षेत्र अशोकपुर और दरियावगंज दो ग्राम पंचायतों के बीच पड़ता है। ग्राम पंचायतें भी झील के अस्तित्व को बचाने में नाकाम रहीं है। इनके द्वारा कोई काम ठोस रूप से नहीं किया गया।
इस झील को पंछी विहार का रूप देने के लिए 2 वर्ष पूर्व शासन में प्रस्ताव भी भेजा गया था। वन विभाग के माध्यम से पटियाली की विधायक ने शासन तक इस प्रस्ताव को लेकर पैरवी की। शासन ने जिले के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को कोई तवज्जों नहीं दी। तत्कालीन जिलाधिकारी ने झील तक आने जाने के रास्ते बनवाए, कुछ हट बनवाए गए लेकिन झील का अस्तित्व बचाने के लिए कोई कवायद नहीं की गई। झील के उद्गम को लेकर तो कोई प्रमाणिक जानकारी नहीं है। माना जाता है कि सैंकड़ों वर्ष पूर्व झील क्षेत्र में गंगा की धारा मौजूद थी। धारा के रास्ता बदलने से गंगा का बहाव अलग हो गया और झील बनी रही। झील के जमीनी स्रोत भी सिल्ट एकत्रित होने के कारण समाप्त हो गए हैं।
मछली पालक भी हैं परेशान
पटियाली। मत्स्य विभाग दरियावगंज की झील में मछलियों को पकड़ने के लिए ठेके उठाता है। अब जब झील में पानी नहीं है तो मछली पालन भी नहीं हो सकता। मछली पालन करने वाले ग्रामीण भी अब परेशान हैं। ग्रामीण रूम सिंह ने बताया कि पहले काफी चहल पहल यहां रहती थी। सैलानी भी आते थे लेकिन अब कोई नहीं आता। मछली पकड़ने वाले भी नहीं आते। झील के आसपास के इलाके में ताड़ के काफी वृक्ष हैं। यह वृक्ष झील के वातावरण को और सुंदर बनाते हैं।
दरियावगंज की झील सूख गई है। जमीन से निकलने वाले पानी के स्रोत सिल्ट कीचड़ से दबे हुए हैं। पिछले वर्षों में कम बारिश होने का प्रभाव भी झील पर पड़ा है। शासन को पक्षी विहार का प्रस्ताव भेजा गया है। यदि शासन इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो एक अच्छा पक्षी विहार जिले का गौरव बन सकता है। - एके शाक्य वन क्षेत्राधिकारी, पटियाली