पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य
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पूर्व मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती अब खजाना भरने में जुटी हैं। दलित पिछड़ों एवं शोषितों के सम्मान का नारा देकर सत्ता में आई मायावती अब दौलत के खेल खेल रही हैं। यह विचार पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने नगर के जिला पंचायत सभागार में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में व्यक्त किए।
लोकतांत्रित बहुजन मंच के तत्वावधान में आयोजित मंडलीय कार्यकर्ता सम्मेलन में मौर्या ने कहा कि 35 वर्ष के राजनीतिक जीवन में 20 वर्ष बसपा में बिताए। लेकिन दौलत की बेटी मायावती ने दलितों के सम्मान का सौदा शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि 2012 में मायावती ने थैली के चक्कर में प्रदेश के 130 टिकट काटे और पार्टी मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। मौर्य ने लोकसभा चुनावों में दलितों को 25 लाख, पिछड़ों को 50 लाख एवं सामान्य वर्ग से एक करोड़ रुपये में टिकट बेचने का आरोप लगाया। जिला पंचायत के ढाई लाख से पांच लाख में टिक बेचे गए। उन्होंने कहा कि बाबा साहब के मिशन और कांशीराम की सोच एवं दलितों के सम्मान के सौदे के विरोध में उन्होेंने 22 जून 2016 को बसपा छोड़ दी और मंथन बाद आठ अगस्त को दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गए।
पूर्व मंत्री विनय शाक्य ने माया की दौलत का ब्योरा पेश करते हुए कहा कि दिल्ली में यूपी भवन के पास 25 हजार करोड़ रुपये की लागत का भवन, लखनऊ में 200-200 करोड़ रुपये के तीन बंगलों के अलावा हजारों करोड़ रुपये प्राइवेट सेक्टर में निवेश करने का आरोप कार्यकर्ता सम्मेलन मेें मौर्य ने मायावती पर लगाया है।
एटा। मौर्या की पुत्री एवं विधानसभा लोकसभा चुनाव लड़ चुकीं डॉ संघमित्रा मौर्या ने मायावती को खंडित देवी की मूर्ति बताते हुए कहा कि ऐसी खंडित मूर्तियों को अपशगुन मानकर लोग सुनसान पेड़ के नीचे या गंगा में प्रवाहित कर देते हैं। अब समय आ गया है जब प्रदेश को अपशगुन से बचाने के लिए मायावती को भी त्यागना होगा। बताते चलें कि मायावती ने स्वयं को दलितों की देवी बताया था।
पूर्व मंत्री मौर्या ने कहा कि सपा राजनीतिक दल नहीं वरन गुंडों की जमात बन गई है। सरकार पर गुंडे हावी हैं। सपा सरकार में समाजवाद की परिभाषा बदल कर जितना बड़ा अपराधी, उतना बड़ा समाजवादी कर दिया है। कांग्रेस पार्टी भ्रमित है। नेता ही गायब रहते हैं तो पार्टी का गायब होना लाजिमी है। भाजपा की वैचारिक क्रांति, देश के प्रधानमंत्री मोदी की दलित-पिछड़ों के प्रति सोच, बाबा साहब के प्रति सम्मान ने उन्हें आकर्षित किया। सम्मेलन को संयोजक पूर्व विधायक अजय यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष डा.दिनेश वशिष्ठ आदि ने भी संबोधित किया। उपस्थित लोगों में अशोक रत्न शाक्य, सत्यपाल सिंह राठौर, कुबेर सिंह अंगरिया समेत अनेक भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।