एटा। कई गांवों में जंगली जानवर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सुअर, नीलगाय और बंदरों के झुंड फसलों को उजाड़ रहे हैं। इसकी भरपाई के लिए काेई व्यवस्था नहीं है। अभी आलू की बुवाई व मटर के सीजन के बीच किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि सरकार द्वारा फसल नुकसान के लिए मुआवजे की घोषणा से लाभ मिलेगा।
किसानों का कहना है कि खेतों में सबसे अधिक नुकसान जंगली सुअर व नीलगाय करते हैं। कस्बा सकीट निवासी किसान सुरेंद्र कुमार ने बताया कि आलू, मटर, गेहूं जैसी फसलों में सुअर रातभर में पूरा खेत ही जोत देते हैं। वहीं नीलगाय झुंड बनाकर खड़ी फसल चट कर जाते हैं। बंदरों का उत्पात भी बढ़ रहा है। दिन में खेतों में खड़ी फसलों को उखाड़ देते हैं।
अवागढ़ निवासी किसान प्रभुदयाल ने बताया कि जंगली जानवरों से हर सीजन औसतन 20 से 30 प्रतिशत तक फसल नुकसान हो जाता है। कुछ प्रभावित गांवों में यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है। किसान किशनपाल ने बताया कि हर एक सीजन में किसान किसी न किसी रूप में प्रभावित होते हैं। खासकर वे किसान जिनकी जमीन नहर पटरी के आसपास है। उनकी फसलें हर बार अधिक संकट में रहती हैं।
फसल बीमा योजना में सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं लेकिन जंगली जानवरों से होने वाला नुकसान बीमा दायरे से बाहर है। कई इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं से होता है। -अनिल राजपूत, अंबरपुर बुड़िया
अगर सरकार जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को बीमा योजना में जोड़ दे तो किसानों की आधी चिंता खत्म हो जाएगी। हर बार फिर से बुवाई, खाद-बीज का खर्च उठाना बेहद कठिन हो जाता है। -अवधेश पंडित, गांव रसीदपुर माफी
सरकार की फसल बीमा योजना में सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं। जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान का उपाय केवल खेतों की रखवाली है। अगर कहीं अधिक जानवर हैं तो इसकी सूचना वन विभाग को दें जिससे जानवरों से हो रहे नुकसान को रोका जा सके। -सुमित कुमार, उपनिदेशक कृषि
अनिल राजपूत
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