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घर का चिराग बुझा तो गुजारे का सहारा भी नहीं रहा

Sun, 17 Jul 2016 12:08 AM IST
अमर उजाला एटा
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कहर बनकर टूटी जहरीली शराब - फोटो : अमर उजाला
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शराब की लत पहले ही परिवार की खुशियों को छीन चुकी थीं, अब जहरीली शराब के रूप में आई मौत का कहर 12 परिवारों पर टूटा है। मरने वाले गरीब और मजदूर पेशा लोग थे। सस्ती शराब के चक्कर में इस जहर को पी रहे थे। इस घटना में किसी के घर का चिराग बुझा तो के घर का गुजारे का सहारा चला गया।
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अलीगढ़ क्षेत्र में कोहराम मचा हुआ है। घटना के बाद अधिकारियों और पुलिस और अधिकारियों की गाड़ियां दौड़ रही हैं। पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद का मरहम लगाया जा रहा है, सवाल यही है कि यदि पहले ही इस जहर बेचने के धंधे पर लगाम ली होती तो यह मौतें न होती।  

काश, रमेश ने मान ली होती बेटियों की बात
लुहारी दरवाजा निवासी राजेश उर्फ रमेश पुत्र पुत्तूलाल दरवाजा पेशे से किसान था। तीन बेटियों और एक बेटे के पिता रमेश की पत्नी जयदेवी गर्भवती है। अगले महीने उनके घर में नया मेहमान आने वाला है।  शुक्रवार शाम राजेश जब घर से शराब पीने जा रहा था, तो बेटी अंजली, अलका और रंजना ने रोका, लेकिन रमेश को क्या पता था कि उसे मौत बुला रही है।
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शनिवार को राजेश की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा था। बेटियां को अफसोस था कि काश पापा मान जाते तो आज वे जिंदा होते। 12 साल के बेटे दीपक को तो पता ही नहीं था कि अब उसके पापा इस दुनिया में नहीं रहे। राजेश की दो बेटियां अलका और अंजली तो शादी लायक हैं। 

इकलौते बेटे को छीन ले गई जहरीली शराब
लुहारी दरवाजा निवासी दूसरा मृतक अतीक पुत्र सद्दीक के घर पर भी चीख पुकार मची हुई थी। जहरीली शराब ने घर का चिराग ही बुझा दिया। अतीक सद्दीक का इकलौता पुत्र था। दो बहनों ने अपने भाई को खो दिया।  

भरपुरा निवासी मृतक नेत्रपाल पेशे से मुनीम था, तो सर्वेश एक ईंट भट्ठे पर ट्रैक्टर चला कर परिवार को गुजारा करता था। अधिकतर मृतक मजदूर और किसान थे, जो रोज कमाकर अपने परिवार को चलाते थे, लेकिन शराब की लत उनके लिए मौत का सबब बन गई।
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