हीरा नगला में रविवार को लगी आग से 50 लोगों के मकान जल गए। घटना सुबह के समय हुई। विजेंद्र के मकान से लगी आग फैलती चली गई। इन मकानों में रखा सामान, नकदी आभूषण, गल्ला सब कुछ जल गया।
सुबह विजेंद्र के मकान के छप्पर से लपटें उठने लगी। देखते ही देखते आग की लपटों ने आस-पास के मकानों में अपने आगोश में ले लिया। मकानों के अलावा आस-पास बने बुर्जी बिटोरे भी चपेट में आ गए। गांव में इंजन पंप चलाकर पानी डाला गया, लेकिन आग की लपटें बहुत तेज थीं।
सूचना पर पहुंचे दमकलकर्मियों ने कई घंटे बाद आग पर काबू पाया। इस आग में लाखों की क्षति हुई। ग्रामीण विजेंद्र सिंह के मकान में पालेज की बिक्री के 25 हजार रुपये जल गए। वहीं ग्रामीण पेशकार की तंबाकू बिक्री के रखे दो लाख रुपये जल गए। इसके अलावा ग्रामीण हवलदार, रामरहीस, घनश्याम, कलावती, विजेंद्र, हाकिमसिंह, टीकाराम, नरसिंह, इनामसिंह, मुलायमसिंह, आलमसिंह, औसान सिंह, सौरभ, पेशकार, देवेंद्र, चंद्रशेखर, राजाराम, हृदेश, ओमवीर, जुगेंद्र सिंह, झब्बू, कुंवरपाल, पृथ्वीराज, अशर्फीलाल, रामभरोसे, राकेश, मुकेश, सत्येंद्र, साहबसिंह के मकानों में रखा समान भी जल गया। आग की सूचना पर तहसीलदार मनोज कुमार, कानूनगो सत्यवीर सिंह, लेखपाल संजीव कुमार व अन्य राजस्वकर्मी पहुंच गए।
धरी रह गई शादी की तैयारियां
हीरा नगला के अग्निकांड के दौरान ग्रामीण किशनपाल पुत्र पप्पू यादव की बारात 11 जून को शाहजहांपुर जानी थी। चढ़ावा, जेवर और अन्य सामान मकान में रखा था। जो आग में चल गया। शादी की तैयारियां आग की भेंट चढ़ गईं। परिवारीजनों का रो रो कर बुरा हाल था।
आग बुझाते दमकलकर्मी हुआ बेहोश
हीरा नगला में अग्रिकांड के दौरान दमकलकर्मी राजकुमार सिंह आग बुझा रहा था। दोपहर की आग और आग की लपटों की गरमी से उसे चक्कर आए। जिसकी उसने अन्य लोगों से शिकायत की। कुछ देर में वह बेहोश हा गया। उसे ग्रामीणों ने मौके से हटाया और उसके चेहरे पर पानी के छीटें मारे, जिससे बाद उसकी चेतना वापस आई।