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मलावन गोशाला में दो दिन में चार गाय मरीं

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एटा। मलावन स्थित अस्थाई गोशाला में ठंड और बीमारी से चार गाय मर र्गइं। वहीं कुछ गोवंश अंतिम सांसें गिन रहे हैं। बीमारी से मर रहीं गायों के उचित इलाज की व्यवस्था तक नहीं हैं। गायों को मथुरा स्थित वेटरनेरी विवि ले जाने के लिए वाहन तक की व्यवस्था नहीं है। जबकि सूत्रों के अनुसार यहां बीते दो दिनों में 18 से अधिक गोवंशों की मौत हो चुकी है।
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करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जिले की गोशालाओं में गोवंश मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मलावन गोशाला में 336 गोवंश है। यहां गोवंश बीमारी, ठंड व भूख से तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे है। गोशाला में कई गोवंश बीमार हैं, समय से उनको उपचार नहीं मिल पा रहा है।
दो माह पूर्व गोशाला में आधा दर्जन गायों की मौत हो गई थी। इस पर डीएम सुखलाल भारती मौके पर गए। उन्हें वहां बिना जियो टैगिंग के गोवंश देखने को मिले। उन्होंने टैगिंग करने के निर्देश दिए।
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आपस में लड़कर मरी है गाय
गोशाला में जगह का अभाव है। सांड़ ज्यादा हैं इसके चलते वह आपस में लड़ते हैं। इस कारण ही दो गाय घायल हो गई थीं। वह मर गईं। दो दिन पहले जो दो गाय मरीं थीं, वह बीमार थीं। -एके सक्सेना, पशु चिकित्सक मलावन
एक पशु के चारे को तीस रुपये प्रतिदिन
गोशाला में रह रहे निराश्रित पशुओं के लिए एक गाय का 30 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से शासन द्वारा धनराशि दी जाती है। मलावन में स्थाई गोशाला लगभग एक वर्ष पूर्व बनी है। यहां 336 निराश्रित पशु रह रहे हैं। इस हिसाब से गोशाला को निराश्रित पशुओं के खाने के लिए 10,080 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है।
सांड़ से मरी दो गाय
गोशाला में सांड़ों की संख्या अधिक है। इसके चलते भी समस्या है। सांड़ों ने गायों को सींग मारकर घायल कर दिया था। उनका इलाज चला, लेकिन वह मर गई। गोशाला में दो गायों की मौत हुई है।
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एसपी सिंह सोलंकी, सीवीओ
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