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हाईकोर्ट ने डीएम से ऐसा क्यों कहा कि रिकवरी का अधिकार आपको नहीं

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एटा। डीएम को ग्राम प्रधान से रिकवरी कराने का अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने एक मामले में आदेश सुनाते हुए राज्य सरकार को रिकवरी के लिए विहित प्राधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने एटा समेत प्रदेश के 16 जिलों के प्रधानों की याचिकाओं को शामिल कर फैसला सुनाया है।
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दरअसल, मार्च 2019 में जिले के जैथरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत खिरिया बनार के प्रधान उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तत्कालीन सीडीओ ने 18,20,820 रुपये का गबन तय करते हुए रिकवरी कराने के आदेश जारी किए थे। जांच में पाया कि प्रधान उदय प्रताप उर्फ हरिकेश और सचिव विवेक कुमार ने मिलकर ग्राम निधि खाते के धन को तीन रिश्तेदारों के खाते में भेजकर निकाल लिया। जबकि व्यक्तिगत खाते में भी ग्राम निधि की राशि भेजी गई।
इसके बाद प्रधान उदय प्रताप ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रदेश के अन्य जिलों की 16 याचिकाओं को शामिल करते हुए 19 सितंबर को फैसला रिजर्व कर लिया। 30 सितंबर को हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पंचायती राज एक्ट की धारा 27 के तहत डीएम को प्रधान से रिकवरी कराने का अधिकार नहीं है। डीएम केवल प्रधान के अधिकार सीज कर सकते हैं और निलंबित कर सकते हैं। इसके लिए राज्य सरकार विहित प्राधिकारी के जरिए गबन की जानकारी डीएम को देगी। डीएम प्रधान से जवाब तलब करने के बाद ही रिकवरी करा सकते हैं। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि रिकवरी के मामलों के लिए राज्य सरकार ने अब तक कोई प्राधिकारी नियुक्त नहीं किया है। राज्य सरकार प्राधिकारी नियुक्ति कर नया कानून बनाए।
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हाईकोर्ट के अधिवक्ता अरविंद सिंह बताते हैं कि कोर्ट के आदेश में साफ तौर डीएम को रिकवरी नहीं कराने के लिए कहा गया है। जबकि एटा में सीडीओ ने आदेश जारी किया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 16 प्रधानों को कोर्ट के आदेश के बाद राहत मिल गई है।
जिले में कई प्रधानों पर हुई है कार्रवाई
जिले में कई प्रधानों पर जांच के बाद गबन की पुष्टि होने पर कार्रवाई की गई है। कोर्ट के आदेश के बाद प्रधानों में खुशी की लहर है। प्रधान संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संतोष यादव का कहना है कि कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। प्रशासन और सरकार प्रधानों का उत्पीड़न कर रही है। आदेश के बाद इस पर रोक लगेगी।
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