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घर-घर बिछी बुखार के मरीजों की चारपाइयां

Wed, 30 Sep 2015 06:06 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
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बदलते मौसमी चक्र से बीमारियों ने घर-घर में दस्तक दी हुई है। कस्बा व  ग्रामीण क्षेत्र के घरों में बुखार से पीड़ित मरीजों की चारपाइयां बिछी  हैं। तीन दिन के अंतराल में दो लोगों की डेंगू के चलते मौत होने से बुखार  पीड़ितों में डेंगू का खौफ देखा जा रहा है। डिप्रेशन में आए मरीज हल्का  बुखार होने पर भी प्लेटलेटस चैक करा रहे हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग  मौन साधे हुए है।
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कस्बा में संक्रमण की तरह फैल चुके जानलेवा बुखार के  कारण लोगों में दहशत है। अगर बात डेंगू की करें तो कस्बा निवासी सर्वेश  पत्नी संतोष व पालिकाध्यक्ष गंगादेवी के भतीजे डालचंद्र की डेंगू के चलते  मौत हो गई। सर्वेश का कासगंज वहीं डालचंद्र को आगरा में चिकित्सकों ने  डेंगू की पुष्टि की। इनके अलावा पालिकाध्यक्ष का 12 वर्षीय पौत्र प्रियांशु  भी डेंगू की चपेट में है, जिसका उपचार आगरा में चल रहा हैं। कस्बा व  ग्रामीण क्षेत्र के लगभग एक दर्जन से अधिक डेंगू पीड़ित मरीज अन्य शहरों  में अपना उपचार करा रहे हैं। कस्बा के मोहल्ला तालागढ़, कम्बोह, बड़ा  बाजार, कायस्थान, चोबदार, कटरा, ब्रहमणपुरी, काजी, सराय मीरा आदि मोहल्ले  ऐसे हैं जहां प्रत्येक घर में बुखार का मरीज मौजूद है। हालात खराब होने के  बावजूद स्वास्थ्य विभाग इन सबसे बेखबर है। विभाग द्वारा कस्बा व ग्रामीण  क्षेत्र में कोई कैंप नहीं लगाया गया है। प्रत्येक दिन दो सैकड़ा से अधिक  मरीज कस्बा स्थित सामुदायिक स्वास्थ केंद्र पर पहुंच रहे हैं। कस्बा स्थित  चिकित्सकों के क्लीनिक पर भी बेतहाशा मरीज अपना उपचार करा रहे हैं। झोलाछाप  डॉक्टरों ने सामान्य बुखार के मरीजों में डेंगू का डर फैला रखा है जिससे  वह उनका उपचार कर रकम ऐंठ रहे हैं।
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नहीं चेता स्वास्थ्य विभाग तो बिगड़ सकते हैं हालात
मारहरा।  वर्तमान में बुखार की जद में कस्बा व क्षेत्रीय ग्रामीण इलाका है। स्थिति  पर गौर किया जाए तो हालात वर्ष 2010 की तरह जानलेवा हो चुके हैं, अगर  स्वास्थ्य विभाग का रवैया ऐसे ही ढीला ढाला रहा तो कितने और मरीजों की जान  पर बन सकती है। इसी वर्ष की तरह ही बीते वर्ष 2010 के सितंबर एवं अक्तूबर  के माह में बीमारी से कई लोगों की जानें चली गई थीं। तब स्वास्थ्य विभाग ने  तीन दिवसीय कैंप लगाया जिसमें छह हजार से अधिक मरीजों ने परीक्षण के बाद  दवाएं ली थीं।
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कीवी के एक फल की कीमत 60 रुपया
मारहरा। डेंगू  के मरीजों को चिकित्सकों द्वारा कीवी के फल एवं पपीते के पत्ते बताए जाने  पर इनकी मांग इतनी बढ़ गई है कि जहां पपीते के पत्तों का अकाल पड़ गया है  वहीं कीवी का फल 60 रुपया में बिक रहा है।
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अस्पताल दो बजे बंद होने के चलते झोलाछाप चिकित्सकों की पौ- बारह
मारहरा।  कस्बा में स्थित सीएचसी केंद्र पर दो बजे ताले लग जाते हैं। साथ ही कोई भी  चिकित्सक केंद्र पर बने आवासों में निवास नहीं करता है इसके चलते झोलाछाप  चिकित्सकों की तो मानो लाटरी ही खुल गई है।
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कस्बा के चिकित्सक भी बन रहे रोडा
मारहरा।  कस्बा के चिकित्सक भी बुखार से पीड़ित मरीजों को दो से तीन दिन तक भर्ती  रखते हैं उसके बाद हालात खराब होते ही वह बाहर की सलाह देकर निकाल देते  हैं।
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नाते रिश्तेदारों का भी लग रहा तांता
मारहरा। कस्बा  मारहरा में डेंगू के प्रकोप की सूचना लगने पर कस्बा के लोगों के नाते  रिश्तेदार फोन पर राजी खुशी लेने के अलावा अपने रिश्तेदारों को देखने के  लिए भी दौड़े आ रहे हैं।
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क्या कहते हैं
कस्बा में चिकित्सकों की टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। यदि कोई डेंगू का मरीज मिलता है तो उसका उचित उपचार होगा।
-डॉ. आरसी पांडे, सीएमओ एटा। ॉ
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