उत्तर प्रदेश के एटा में आजादी के महोत्सव में मेरी माटी मेरा देश अभियान के तहत शिलाफलकम (स्मारक) बनाने में कई तरीके से खेल किया गया। जिस फर्म को स्मारक पट्टिका लगाने का ठेका दिया गया, वो प्रिंटिंग प्रेस और डिजाइनिंग का कार्य करती है। अफसरों की सह पर इस फर्म संचालक को कई स्मारकों का भुगतान भी कर दिया गया है।
वर्ष 2023 में स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रदेश सरकार ने मेरी माटी मेरा देश अभियान चलाया था। इसके अंतर्गत ही प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर एक शिलाफलकम् बनाने के निर्देश दिए। इसके तहत मनरेगा से स्मारक का निर्माण कराकर करीब 15 वर्गफीट की स्मारक पट्टिका (ग्रेनाइट की पटिया) लगाई जानी थी।
इस पटि्टका पर प्रधानमंत्री का संदेश और ग्राम पंचायत की विशेष जानकारी दर्ज की जानी थी। इसे गुदवाकर अंकित कराना था। लेकिन पटिया लगाते समय मनमानी की गई। इन पर केवल स्टीकर चिपका दिए गए। जो कुछ ही दिन में छूट या फट गए। कई जगह तो स्मारक के रूप में केवल फाउंडेशन ही बना दिया गया गया। इसमें 10 हजार से 40 हजार रुपये खर्च हुए, लेकिन पट्टिका नहीं लगी।
इस मामले में कई तरह की प्रक्रिया और कार्य अधिकारियों की मंशा और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिस फर्म को यह ठेका दिया गया, वो मूल रूप से कंप्यूटर डिवाइजनिंग, कार्ड, बैनर, पोस्टर, होर्डिंग आदि की प्रिंटिंग का कार्य करती है। ऐसे में इस फर्म से पटिया की आपूर्ति लिया जाना भी संदेह पैदा करता है। डीएम प्रेम रंजन सिंह का कहना है कि मामले की जांच शुरू करा दी गई है। विस्तार से पूरी जांच कराई जाएगी। इससे कि दोषियों को बचने का कोई मौका न मिल सके।