एटा। घंटाघर पर करोड़ों रुपये कीमती मंदिर की संपत्ति पर निर्माण के मामले में अब प्रशासन की जांच और कार्रवाई शुरू हो गई है। एक ओर जहां बिना नक्शा निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण प्रक्रिया संबंधी कार्रवाई चल रही है, तो दूसरी ओर इस संपत्ति के स्वामित्व की भी जांच शुरू करा दी गई है। यह जांच एसडीएम सदर को सौंपी गई है।
शहर के घंटाघर मार्ग पर प्राचीन समय में मंदिर और इससे संबंधित परिसर हुआ करता था। जिसे कुछ महीने पहले ध्वस्त करा दिया गया। प्लाॅटिंग कर जमीन को मोटी रकम में बेच दिया गया। जिस पर खरीदारों ने निर्माण भी करा लिए। इस समय तक प्रशासन को भनक नहीं हुई और ध्वस्तीकरण से लेकर खरीद-फरोख्त व निर्माण सबकुछ आसानी से होता रहा, लेकिन अब शिकायतें शुरू हुईं तो प्रशासन हरकत में आ गया। शिकायतों तथा अमर उजाला की खबरों पर डीएम प्रेम रंजन सिंह ने पूरे मामले की जांच एडीएम वित्त एवं राजस्व आयुष चौधरी को सौंप दी।
एडीएम ने जांच शुरू कराई तो शुरुआती दौर में ही खामियां नजर आ गईं। प्लॉटिंग और निर्माण से संबंधित कोई नक्शा ही पास नहीं कराया गया था। वहीं शुरूआती जांच में यह भी सामने आया है कि यह संपत्ति दान की थी। एडीएम ने एसडीएम सदर को इस तथ्य की जांच के लिए कहा है। इसमें पता किया जाएगा कि मंदिर की भूमि के स्वामित्व की स्थिति क्या है? मंदिर क्या किसी ट्रस्ट आदि से संबद्ध है, यह है तो इसके सर्वराकार या प्रबंधक कौन हैं? उनको मंदिर की संपत्ति के क्रय-विक्रय का अधिकार प्राप्त है? अगर अवैध किया गया है तो कार्रवाई की जाए।
घंटाघर पर संपत्ति क्रय-विक्रय का मामला संज्ञान में आया है। यह मंदिर श्री कृष्ण जसोदा नंदन जी महाराज की संपत्ति बताई जाती है। एसडीएम से इसके अभिलेख मांगे गए हैं। जमीन के स्वामित्व की स्थिति पता की जा रही है। देखा जा रहा है कि ट्रस्ट सर्वराकार या प्रबंधक को संपत्ति बेचने का अधिकार है या नहीं। इसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - आयुष चौधरी, एडीएम वित्त एवं राजस्व